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UPI पर चार्ज लगाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन, सरकार-RBI को नोटिस

यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई और इस नोटिस में चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। बता दें कि यूपीआई मामले पर अधिवक्ता अंजन दत्ता ने जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मामला कानूनी से अधिक तकनीकी है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि नए फ्रेमवर्क के तहत पेमेंट गेटवे के जरिए होने वाले करीब 96 फीसदी ट्रांजैक्शन शुल्क से बाहर रहेंगे। आवश्यक सेवाओं के लिए MDR को 5 रुपये तक सीमित किया जाएगा।

याचिका में क्या है तर्क

अधिवक्ता अंजन दत्ता की याचिका में आरोप लगाया गया है कि पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा उपायों, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना यह शुल्क लगाया गया है। याचिका में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि यह प्रावधान बिना स्पष्ट दिशानिर्देश के कार्यपालिका को यह अधिकार देता है कि कौन सा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम शुल्क मुक्त रहेगा।

बता दें कि 15 अक्टूबर से केंद्र सरकार ने नए फ्रेमवर्क के तहत सामान्य पर्सन टू मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ भुगतान पर 0.4 फीसदी MDR लगाने का फैसला लिया है। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि आदान जैसे आवश्यक तथा कम ‘मार्जिन’ वाले क्षेत्रों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का तय एमडीआर होगा। म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और शेयर ब्रोकर तथा डीलर के जरिये किए जाने वाले भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा।

पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) ट्रांसफर पर रकम की परवाह किए बिना शून्य शुल्क जारी रहेगा। यह यूपीआई के लेनदेन की मात्रा का 37 प्रतिशत और उसके मूल्य का 70 प्रतिशत है। केंद्र सरकार की ओर से बताया गया है कि एमडीआर से जुटाई गई रकम यूपीआई परिवेश से जुड़े बैंकों और अन्य संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी। इसमें से 40 प्रतिशत राशि ग्राहक के बैंक, 30 प्रतिशत भुगतान गेटवे, 20 प्रतिशत यूपीआई ऐप और शेष 10 प्रतिशत राशि यूपीआई ऐप के प्रायोजक बैंक को मिलेगी।

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