New Delhi: प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने आतंकी संगठनों स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) और इंडियन मुजाहिद्दीन (Indian Mujahideen) को फंडिंग करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में राजू खान (Raju Khan) नाम का शख्स मुख्य कड़ी के रूप में सामने आया है, जिसके खिलाफ ED ने कड़ा एक्शन लिया है। जांच में खुलासा हुआ कि राजू खान ने अपने बैंक अकाउंट में जमा 48.82 लाख रुपये में से 42.47 लाख रुपये आतंकी नेटवर्क को ट्रांसफर किए, जबकि 6.34 लाख रुपये को कमीशन (Commission) के रूप में अपने पास रखा।
Terror Funding Network Exposed: ED की जांच छत्तीसगढ़ पुलिस की एक FIR पर आधारित है, जो रायपुर के खमतराई थाने में दर्ज की गई थी। इस FIR में दावा किया गया कि कुछ बैंक खातों का इस्तेमाल पाकिस्तान के “Khalid” नाम के शख्स के निर्देश पर भारत में अज्ञात स्रोतों से फंड्स इकट्ठा करने के लिए किया जा रहा था। ये फंड्स राजू खान, ज़ुबैर हुसैन (Zubair Hussain), और आयशा बानो (Aysha Banu) जैसे SIMI और Indian Mujahideen से जुड़े लोगों तक पहुंचाए गए। जांच में पता चला कि धीरज साव (Dheeraj Sao), जिसे धीरज कुमार के नाम से भी जाना जाता है, इस नेटवर्क में फंड्स को मल्टीपल लेयरिंग (Multiple Layering) के जरिए डायवर्ट करने का काम कर रहा था।
Raju Khan’s Role
ED की जांच में राजू खान को इस टेरर फंडिंग नेटवर्क का अहम हिस्सा पाया गया। उसके बैंक अकाउंट में 48.82 लाख रुपये कैश डिपॉजिट किए गए, जिसमें से उसने 42.47 लाख रुपये SIMI और Indian Mujahideen के सदस्यों को ट्रांसफर किए। इन फंड्स का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों जैसे ट्रेनिंग (Training), भर्ती (Recruitment), और नेटवर्क को सक्रिय रखने में किया गया। राजू खान ने करीब 13% यानी 6.34 लाख रुपये को अपने कमीशन के रूप में रखा, जिसे ED ने प्रोसीड्स ऑफ क्राइम (Proceeds of Crime) माना है।
ED’s Action
प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत राजू खान की 6.34 लाख रुपये की अचल संपत्ति (Immovable Property) को अटैच किया है। इसके अलावा, इस केस में अब तक कुल 9.15 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति (Movable and Immovable Assets) अटैच की जा चुकी है। ED का कहना है कि यह कार्रवाई आतंकी फंडिंग के खिलाफ एक बड़ा कदम है, और जांच अभी भी जारी है।
Ongoing Investigation
जांच एजेंसी का मानना है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं। हवाला (Hawala) और लोकल एजेंटों के जरिए चलने वाली इस फंडिंग की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने के लिए ED लगातार काम कर रही है।



















