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पितरों को समर्पित सर्वपितृ अमावस्या कब? जानें श्राद्ध और दान की पूरी जानकारी

पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान पितर अपने वंशजों के यहां आते हैं और सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनकी विदाई की जाती है। इसलिए इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करने का विशेष महत्व माना जाता है।

भूले-बिसरे पितरों का भी कर सकते हैं श्राद्ध

मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन उन पूर्वजों का भी तर्पण किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु की सही तिथि याद नहीं है। ऐसे पितरों के लिए अमावस्या के दिन श्राद्ध, तर्पण और दान करने की परंपरा है। इसके अलावा, जिन पूर्वजों का श्राद्ध किसी कारण से पितृपक्ष के दौरान नहीं हो पाया हो, उनके लिए भी सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है। इसी वजह से इसे भूले-बिसरे पितरों के श्राद्ध के लिए महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

पितरों तक जाता है यह दान

आपको बता दें कि सर्वपितृ अमावस्या पर जो दान कियाजाता है वो पितरों तक पहुंचता है। इससे न सिर्फ उनकी आत्मा को तृप्त होती है, बल्कि वे आपकोआशीर्वाद देकर जाते हैं। इससे घर में खुशहाली आती है। इसके अलावा इस दिन दान आदि भी करना चाहिए। इस दिन अन्न और काले तिल का दान करना चाहिए। पंखा, पानी, छाता, जूते चप्पल और पितरों के लिए कपड़ों का दान करना भी उत्तम होता है। अगर आप इस दिन दान देने और श्राद्ध करने में सक्षम नहीं हैं तो आप सिर्फ गाय को हरा चारा खिला दें या कुत्तों-कौवों को भोजन देना (पंचबलि कर्म) आपके श्राद्ध को सफल बना सकते हैं। श्राद्ध और तर्पण में पिता पक्ष की तीन पीढ़ियों पिता, पितामह और प्रपितामह तथा माता पक्ष की तीन पीढ़ियों माता, पितामही और प्रपितामही का श्राद्ध एवं तर्पण किया जाता है।

1 अक्टूबर को होगा पंचमी और षष्ठी तिथि का श्राद्ध

पितरों की प्रसन्नता के लिए महालय पक्ष में चल रहे तर्पण और श्राद्ध के उपलक्ष्य में पंचमी और षष्ठी तिथि का श्राद्ध एक अक्टूबर को किया जाएगा। श्राद्ध की तिथि को लेकर चल रहे संशय है श्राद्ध हमेशा मध्यान्ह अथवा अपराह्न काल में प्राप्त होने वाली तिथि में ही किया जाना उचित माना गया है। अब षष्ठी तिथि एक अक्टूबर को दोपहर 12:35 बजे से शुरू होकर दो अक्टूबर की सुबह 10:15 बजे समाप्त होगी। कुछ जगहों पर सप्तमी और षष्ठी का श्राद्ध 2 अक्टूबर को भी किया जाएगा। सप्तमी तिथि का श्राद्ध दो अक्टूबर को सुबह 10:15 बजे के बाद किया जाएगा।

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