दिल्ली. उत्तर प्रदेश भाजपा के अंदर इन दिनों शह-मात का खेल जारी है. राज्य में अपनी पसंद का प्रदेश अध्यक्ष पाने में असफल बताए जा रहे राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना राजनीतिक सुदर्शन चक्र चलते हुए एसआईआर पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने कहा है कि राज्य में करीब 4 करोड़ मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं. इनमें से अधिकतर करीब 85 प्रतिशत भाजपा के मतदाता हैं. इसे कुछ लोग एसआईआर पर सवाल करार दे रहे हैं. लेकिन भाजपा के अंदरूनी जानकारों का मानना है कि अपने इस बयान से योगी ने नए प्रदेश अध्यक्ष पर दबाव बनाने के साथ ही रणनीतिकारों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने यह संकेत दिये हैं कि संगठन ने सही से काम नहीं किया, जिसकी वजह से बूथ लेवल एजेंट यह नहीं पता कर पाया कि इतने बोट कट गए.
4 करोड़ मतदाताओं के साथ खेला
असल में योगी के इस बयान को इस संदर्भ में भी देखा जा रहा है कि उन्होंने विस चुनाव 2027 के नतीजों को लेकर भी एक चेतावनी देने का कार्य किया है. उन्होंने यह संकेत दिये हैं कि अगर ये 4 करोड़ मतदाता फिर से सूची में नहीं आए तो उप्र में भाजपा को चुनाव में दिक्कत हो सकती है. उन्होंने परोक्ष रूप से केंद्रीय नेतृत्व को यह बताया है कि प्रदेश अध्यक्ष भले ही उनकी मर्जी का न चुना गया हो, लेकिन संगठन और सरकार में उनके काम को अगर रोकने का कार्य किया गया या बाधा उत्पन्न की गई तो उसका असर वर्ष 2027 के चुनाव पर हो सकता है.


















