जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर में 2016 के बहुचर्चित फर्जी भर्ती मामले पर एक बार फिर गाज गिरी है। बैंक प्रबंधन ने 29 कर्मचारियों को सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इनमें ब्रांच मैनेजर, समिति प्रबंधक, सहायक लेखापाल, पर्यवेक्षक और लिपिक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं। स्टाफ कमेटी की बैठक में सेवा से हटा दिया गया है। खास बात यह है कि इन कर्मचारियों की पुनः नियुक्ति को लेकर चली कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट में भी हार गई है।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र पांडे के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई थीं। वर्ष 2016 में इस घोटाले में 106 कर्मचारियों की फर्जी तरीके से भर्ती किए गए थे। बैंक के प्राधिकृत अधिकारी की अध्यक्षता में बनी स्टाफ कमेटी ने सीईओ के नेतृत्व में 4 वरिष्ठ शाखा प्रबंधकों की जांच टीम गठित जांच के बाद चरणबद्ध तरीके से दिनांक 4, 5 और 8 अगस्त 2025 को हुई. बैठकों में बैंक ने 60 से अधिक कर्मचारियों को पहले ही बर्खास्त कर दिया था। 1 शाखा प्रबंधक, 4 सहायक लेखापाल, 8 पर्यवेक्षक, 6 लिपिक सह कंप्यूटर ऑपरेटर और 10 समिति प्रबंधकों कुल 29 कर्मचारियों को दोषी मानते हुए फिर से सेवा से बाहर करने का निर्णय लिया गया। लेकिन 29 कर्मचारियों ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने बैंक को कार्रवाई के लिए दिया निर्देश
मामले की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई, जब पंकज तिवारी समेत 29 कर्मचारियों को भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के चलते बर्खास्त किया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने उच्च न्यायालय बिलासपुर में पिटीशन दायर की। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने रिट अपील दाखिल किया। हाईकोर्ट ने सुनवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत बैंक को आदेश दिया कि वह विभागीय कार्यवाही पूरी करें।
अब अगली कार्रवाई पर टिकी लोगों की निगाहें
यह कदम सहकारी बैंकिंग प्रणाली में ईमानदारी और जवाबदेही के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है। बैंक के भीतर अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बची हुई बाकी फर्जी नियुक्तियों पर भी जल्द कार्रवाई होगी। न्यायालय ने गलत भर्ती पर सख्त रुख अपनाने में कोई ढील नहीं दी। अब बैंक प्रशासन पर निगाहें हैं कि वह इस फैसले के बाद पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में क्या कदम उठाता है।
कानूनी पचड़े से बचने किया केविएट दायर
कर्मचारियों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अगस्त 2025 को अपील खारिज कर दी, जिससे बैंक प्रबंधन का फैसला पूरी तरह मजबूत हो गया। प्रबंधन का कहना है कि भ्रष्टाचार और फर्जी भर्ती जैसे मामलों में कोई समझौता नहीं होगा। बैंक ने भविष्य में कानूनी पचड़ों से बचने के लिए हाईकोर्ट में ‘केविएट’ भी दायर कर दिया है, ताकि किसी भी नई याचिका पर उन्हें पूर्व सूचना मिल सके।


















