वृंदावन में होली का उत्साह इन दिनों चरम पर है। बांके बिहारी जी के मंदिर में रंगभरी एकादशी पर ठाकुर जी को रंग और गुलाल लगाया गया। मंदिर का आंगन अबीर-गुलाल से रंगा नजर आया। भक्तों ने सुबह-सुबह प्रसादी गुलाल बरसाया और ठाकुर जी के साथ होली की शुरुआत की। फूलों की पंखुड़ियां, जलेबी और लड्डू लुटाए गए। यह सब कुछ ब्रज की होली की खास परंपरा का हिस्सा है। आइए जानते हैं वृंदावन में बांके बिहारी जी की होली का पूरा नजारा और होली पर ठाकुर जी को क्या-क्या भोग लगेगा।
वृंदावन में बांके बिहारी जी को रंग-गुलाल लगाने की शुरुआत
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में रंगभरी एकादशी पर पुजारियों ने सुबह ठाकुर जी को रंग और अबीर लगाया। मंदिर का पूरा प्रांगण गुलाल से सराबोर हो गया। भक्तों ने प्रसादी गुलाल बरसाया और ठाकुर जी के जयकारे लगाए। फूलों की पंखुड़ियां और लड्डू-जलेबी लुटाई गई। भक्त अबीर से रंगे हुए ठाकुर जी के दर्शन कर खुशी से झूम उठे। गलियों में ढोल-नगाड़ों की थाप और ‘राधे-राधे’ के जयकारे गूंज रहे हैं। यह नजारा ब्रज की होली की भक्ति और उल्लास का जीता-जागता प्रमाण है।
बांके बिहारी जी को लगने वाला विशेष भोग
होली के दौरान बांके बिहारी जी को विशेष भोग तैयार किया जाता है। आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार, ठाकुर जी को काबुली मेवा, कश्मीरी केसर, कन्नौजिया इत्र, कर्नाटकी चंदन और हाथरस से लाए प्राकृतिक अबीर-गुलाल का उपयोग किया जाता है। भोग में मुख्य रूप से चाट, जलेबी और पकवान शामिल होते हैं। चाट में दहीबड़ा, दही पकौड़ी, सोंठ बड़ा, सोंठ पकौड़ी, आटा-सूजी की टिकिया, पानी पूरी, समोसा, पकोड़े, गुजिया, पापड़ी, खाजा, ठोर और लठोर प्रमुख हैं। इसके अलावा काजू, बादाम, पिस्ता, अखरोट, पोस्त, खरबूजा के बीज, किसमिस, मुनक्का, गुलकंद और दूध-मलाई युक्त ठंडाई भी ठाकुर जी को अर्पित की जाती है।
होली पर ठाकुर जी को लगने वाले व्यंजन और मिठाइयां
होली के भोग में ठाकुर जी को मैदा और आलू से बनी स्वादिष्ट जलेबियां, गुजिया और मलपुआ विशेष रूप से चढ़ाए जाएंगे। ये व्यंजन ब्रज की परंपरा के अनुसार तैयार किए जाते हैं। ठाकुर जी को मिठाई के साथ ठंडाई भी अर्पित की जाती है। यह भोग प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। भक्तों का मानना है कि ठाकुर जी को चढ़ाया गया भोग प्रसाद के रूप में मिलता है और उससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। होली के दौरान ठाकुर जी को रंग-गुलाल के साथ यह भोग लगाने से भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है।
बांके बिहारी जी के दर्शन और भक्तों का उत्साह
बांके बिहारी मंदिर में होली के दौरान भक्तों की भारी भीड़ रहती है। ठाकुर जी को रंग लगाने के बाद भक्त अबीर से सराबोर होकर दर्शन करते हैं। गलियों में भक्त राधे-राधे बोलते हुए गुलाल उड़ाते हैं। कई भक्त लड्डू गोपाल को गोद में लेकर चलते हैं। महिलाएं भी ठाकुर जी के साथ होली खेलती नजर आती हैं। ढोल-नगाड़ों पर झूमते भक्त ‘आज ब्रज में होली रे रसिया’ गाते हैं। वृंदावन की पंचकोसी परिक्रमा भी इन दिनों भक्तों की भीड़ से गुलजार रहती है। यह उत्साह काशी से लेकर ब्रज तक फैलता है।
रंगभरी एकादशी पर बांके बिहारी जी को लगाया गया रंग
ब्रज की होली उत्सव के दौरान रंगभरी एकादशी पर बांके बिहारी जी को रंग लगाया जाता है। इस दिन ठाकुर जी को विशेष शृंगार और भोग भी अर्पित करते है। भक्तों का मानना है कि रंगभरी एकादशी से होली का रस शुरू होता है और यह उत्सव फाल्गुन पूर्णिमा तक चलता है। वृंदावन में ठाकुर जी के दर्शन से भक्तों को प्रेम और भक्ति का आशीर्वाद मिलता है। यह परंपरा ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। बांके बिहारी जी की होली ब्रज की सबसे अनोखी और भक्तिमय होली है। रंग, गुलाल, फूल और भोग से सजा यह उत्सव भक्तों के मन को रस में डुबो देता है।



















