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कल चंद्र ग्रहण कितने बजे से शुरू होगा? जानें सूतक काल और जरूरी बातें

इस साल का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार के दिन लगने जा रहा है। साल के पहले चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह से ही शुरू हो जाएगा। तीन मार्च मंगलवार को फाल्गुन की पूर्णिमा तिथि है। इसी दिन खग्रास चंद्र ग्रहण लगाने जा रहा है। इसकी अवधि तीन घंटा 27 मिनट मानी जा रही है। इस दिन मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। धार्मिक मान्यता अनुसार ग्रहण और सूतक के समय रंगोत्सव भी नहीं होगा और ना ही पूजा पाठ होगी। न ही होली का पूजन होगा। यह कार्य वर्जित माने गए हैं। ग्रहण का असर राशियों और भारत देश पर भी देखा जाएगा। इसलिए चंद्र ग्रहण के चलते रंग वाली होली 4 मार्च को खेली जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं चंद्र ग्रहण का सटीक टाइम, सूतक काल, सावधानी व अन्य जरूरी डिटेल्स-

कल कितने बजे से शुरू होगा चंद्र ग्रहण? जानें सूतक काल समेत जरूरी डिटेल्स

ज्योतिष के अनुसार, चंद्र ग्रहण दोपहर में 3.20 से लगेगा और शाम 6.45 पर समाप्त होगा।

  • उपच्छाया से पहला स्पर्श – 02:16 पी एम
  • प्रच्छाया से पहला स्पर्श – 03:21 पी एम
  • खग्रास प्रारम्भ – 04:35 पी एम
  • परमग्रास चन्द्र ग्रहण – 05:04 पी एम
  • खग्रास समाप्त – 05:33 पी एम
  • प्रच्छाया से अन्तिम स्पर्श – 06:46 पी एम
  • उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श – 07:52 पी एम
  1. खग्रास की अवधि – 00 घण्टे 57 मिनट्स 27 सेकण्ड्स
  2. खण्डग्रास की अवधि – 03 घण्टे 25 मिनट्स 17 सेकण्ड्स
  3. उपच्छाया की अवधि – 05 घण्टे 35 मिनट्स 45 सेकण्ड्स

सूतक काल: कब से शुरू होगा और खत्म होगा सूतक?

चंद्र ग्रहण से पहले सूतक काल नौ घंटे पहले शुरू हो जाता है। इसलिए सुबह छह बजकर बीस मिनट पर सुबह सूतक काल शुरू होगा, जो शाम को 06 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा।

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?

ग्रहण के दौरान भोजन बनाना और खाना अशुभ माना जाता है। इस समय पूजा और शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ग्रहण के समय अनावश्यक यात्रा से भी बचना चाहिए। साथ ही ग्रणह के दौरान चाकू से किसी चीज को काटें नहीं।

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए?

ग्रहण के समय भगवान का नाम जप करना और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर पूजा-पाठ करना चाहिए। घर की साफ-सफाई करें और जरूरतमंदों को दान देना भी शुभ माना जाता है। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं अपने उदर पर गेरू लगाएं। भोजन में कुशा डाल दें। जिससे ग्रहण का प्रभाव खाध्य वस्तुओं पर नहीं होगा। इस दौरान श्रध्दालु पूजा अर्चना के साथ भजन करेंगे। वहीं, काफी श्रद्धालु गंगा घाटों पर पूजा भी करेंगे।

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