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मिडिल ईस्ट युद्ध का असर: छत्तीसगढ़ में निर्माण कार्य ठप, सीमेंट महंगा होने से 40 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट प्रभावित

रायपुर। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब छत्तीसगढ़ के निर्माण कार्यों पर साफ दिखाई देने लगा है। निर्माण सामग्रियों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से प्रदेश में करीब 40 हजार करोड़ रुपये के सरकारी प्रोजेक्ट प्रभावित हो गए हैं। बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के छत्तीसगढ़ चैप्टर ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है।

एसोसिएशन का कहना है कि युद्ध के नाम पर कंपनियां निर्माण सामग्रियों की कीमतों में भारी मुनाफाखोरी कर रही हैं। ईंधन, बिटुमिन और स्टील के बाद अब सीमेंट की कीमतों में तेज उछाल ने बाजार में हड़कंप मचा दिया है। ओपीसी और पीपीसी सीमेंट पर प्रति बैग 80 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्रदेशाध्यक्ष रूपेश सिंघल ने बताया कि बढ़ती लागत के कारण ठेकेदारों के लिए तय समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा करना मुश्किल हो गया है। पीडब्ल्यूडी सहित अन्य विभागों के अनुबंधों में लागत वृद्धि के लिए जो प्रावधान हैं, वे मौजूदा हालात के मुकाबले बेहद कम हैं।

सीमेंट की कीमतों में भारी उछाल

एसोसिएशन के अनुसार, छत्तीसगढ़ में सीमेंट की कीमत 260 रुपये प्रति बैग से बढ़कर करीब 340 रुपये तक पहुंच गई है। यह कीमत पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश की तुलना में 70 से 80 रुपये अधिक है, जबकि कच्चा माल प्रदेश में ही उपलब्ध है। पूर्व अध्यक्ष आलोक शिवहरे और कमलप्रीत सिंह ओबेराय ने सीमेंट कंपनियों पर कार्टेल बनाकर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया है और केंद्र सरकार से इसकी जांच की मांग की है।

राहत पैकेज की मांग, कई मंत्रालयों को पत्र

रायपुर चैप्टर के चेयरमैन सुशील अग्रवाल ने बताया कि एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर वित्त, उद्योग, सड़क परिवहन, शहरी विकास, पेट्रोलियम, रेलवे और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के साथ-साथ राज्य सरकार के विभागों को ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। कॉन्ट्रैक्टर्स का कहना है कि कई निर्माण सामग्रियों की कीमतों में 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि सरकारी अनुबंधों में केवल 10 से 20 प्रतिशत तक ही राहत का प्रावधान है, जो वर्तमान परिस्थितियों में पर्याप्त नहीं है।

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