भारत सरकार ने हाल ही में एथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल (E22 से E30) पर एक्साइज ड्यूटी हटाकर एक बड़ा कदम उठाया है। इस फैसले के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब पेट्रोल सस्ता होगा? फिलहाल, इसका सीधा जवाब अभी ‘नहीं’ है, लेकिन आने वाले सालों में इसका असर आम लोगों की जेब पर जरूर दिखाई दे सकता है। दरअसल, भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब भी दुनिया में युद्ध, तनाव या तेल संकट पैदा होता है, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है। हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और अमेरिका-ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने भी वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। इसी वजह से सरकार लंबे समय से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है।
एथेनॉल उद्योग भीएथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। यह पूरी तरह देश में ही बनता है, इसलिए इसके लिए विदेशी तेल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। साल 2014 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण सिर्फ 1.5% था, लेकिन अब देश के कई हिस्सों में यह आंकड़ा 20% तक पहुंच चुका है। अब सरकार E20 से आगे बढ़कर E22, E25, E27 और E30 जैसे हाई एथेनॉल मिक्स्ड फ्यूल को बढ़ावा देना चाहती है। इसी मकसद से इन फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म की गई है, ताकि तेल कंपनियां इन्हें अधिक मात्रा में तैयार और बेच सकें।
हालांकि, आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंप पर तुरंत राहत मिलने वाली नहीं है, क्योंकि यह छूट तेल कंपनियों और ईंधन उत्पादकों को दी गई है, सीधे ग्राहकों को नहीं। लेकिन, सरकार का मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन पेट्रोल की तुलना में सस्ते पड़ते हैं। इसका एक उदाहरण हाल ही में लॉन्च किया गया E85 फ्यूल है, जिसकी कीमत दिल्ली में लगभग ₹82 प्रति लीटर रखी गई, जबकि सामान्य पेट्रोल करीब ₹102 प्रति लीटर बिक रहा है, यानी लगभग ₹20 प्रति लीटर का अंतर। लेकिन समस्या यह है कि वर्तमान में भारत की ज्यादातर गाड़ियां E85 जैसे ईंधन पर नहीं चल सकतीं।
भारत का एथेनॉल उद्योग भी तेजी से बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 1,700 करोड़ लीटर सालाना से अधिक हो चुकी है। 20% ब्लेंडिंग बनाए रखने के लिए करीब 1,016 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत पड़ती है। इससे किसानों और चीनी मिलों को भी बड़ा फायदा मिल रहा है क्योंकि एथेनॉल उनके लिए अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत बन चुका है।
एक्सपर्ट का मानना है कि अगर आने वाले सालों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (Flex Fuel Vehicles) तेजी से बाजार में आते हैं और एथेनॉल मिक्स्ड फ्यूल का उपयोग बढ़ता है, तो भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे वैश्विक तेल कीमतों के झटकों का असर भी सीमित होगा और लंबे समय में पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
एथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी हटाने का फैसला तत्काल पेट्रोल सस्ता करने के लिए नहीं, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और भविष्य में ईंधन की लागत कम करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। फिलहाल आम लोगों को कीमतों में राहत का इंतजार करना होगा, लेकिन यदि सरकार की यह रणनीति सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में पेट्रोल पर होने वाला खर्च कम हो सकता है और देश को विदेशी तेल पर निर्भरता से भी बड़ी राहत मिलेगी।



















