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कहीं आपका मेकअप प्रोडक्ट “नॉनवेज” तो नहीं? पैकेट पर लिखे ये नाम देखकर हो जाएं सावधान

लड़कियां मेकअप की दीवानी होती है। दिन पर दिन ये क्रेज बढ़ता ही जा रहा। कम उम्र से लेकर ज्यादा उम्र की महिलाएं लिपस्टिक, काजल, फाउंडेशन, ब्लश जैसे प्रोडक्ट का यूज करने से नहीं हिचक रहीं। यहीं नहीं इन ब्यूटी प्रोडक्ट को जेंट्स भी धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं। कलर करेक्शन से लेकर होंठों को नेचुरल पिंक या ग्लॉसी दिखाने के लिए लड़के भी इन मेकअप का यूज करते हैं। लेकिन ये मेकअप ब्यूटी प्रोडक्ट कई बार नॉनवेज होते हैं। इसका मतलब है कि केवल खाने में ही जानवरों और पक्षियों का यूज किया जाता है। इन ब्यूटी प्रोडक्ट्स, मेकअप प्रोडक्ट्स को बनाने के लिए भी जानवर और पक्षियों का यूज करते हैं। और पैकेट्स के पीछे इन चीजों के नाम भी लिखे होते हैं। लेकिन ज्यादातर लोगों को इन नामों का सही मतलब और बनने का प्रोसेस नहीं पता होता। अगर आप भी ऐसे प्रोडक्ट यूज करते हैं तो सावधान हो जाने की जरूरत हैं क्योंकि इसमे जानवरों के अंश इस्तेमाल किए जाते हैं। आपका ब्यूटी, मेकअप रिलेटेड प्रोडक्ट कहीं नॉनवेज नहीं इसका पता करने के लिए पैकेट के पीछे लिखे इन नामों को जरूर पढ़ लें। क्योंकि ये चीजें ज्यादातर जानवरों के अंशों से ही ली जाती है और जानवर मारे जाते हैं।

ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले मुख्य नॉन-वेज तत्व

कारमाइन (Carmine / Cochineal)

यह एक गहरे लाल रंग का डाई (रंग) है, जिसे ‘कोचीनियल’ नाम के कीड़ों को पीसकर बनाया जाता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से लिपस्टिक, ब्लश और नेल पॉलिश को लाल रंग देने के लिए किया जाता है। इसे लेबल पर Natural Red 4 या E120 भी लिखा जाता है।

जिलेटिन (Gelatin)

यह जानवरों (जैसे गाय या सुअर) की हड्डियों, त्वचा और लिगामेंट्स को उबालकर निकाला जाता है। इसका इस्तेमाल क्रीमी टेक्सचर देने के लिए फेस मास्क, गाढ़ी क्रीम और क्लींजर में होता है।

टैलो (Tallow / Sodium Tallowate)

यह जानवरों की चर्बी (Fat) होती है। इसका उपयोग बड़े पैमाने पर साबुन, लिपस्टिक और आई मेकअप में मॉइस्चर और थिकनेस बढ़ाने के लिए किया जाता है।

कोलेजन (Collagen)

एंटी-एजिंग (झुर्रियों को कम करने वाली) क्रीम और सीरम का इस समय खूब इस्तेमाल हो रहा है। जिसमे ये कोलेजन ही मुख्य इंग्रीडिएंट होता है। यह आमतौर पर चिकन के पैरों या मछलियों के अंगों से निकाला जाता है।

स्क्वालीन (Squalene)

यह एक बेहतरीन मॉइस्चराइजर माना जाता है, जो शार्क मछली के लीवर (जिगर) के तेल से निकाला जाता है। हालांकि, आजकल पौधों से मिलने वाला ‘Squalane’ भी आने लगा है। जिससे मॉइश्चराइजर बनाए जाते हैं।

ग्लिसरीन (Glycerin)

ग्लिसरीन पौधों से भी मिलती है और जानवरों की चर्बी से भी। अगर पैकेट पर “Vegetable Glycerin” न लिखा हो, तो आशंका रहती है कि वह नॉन-वेज हो सकती है। जबकि ग्लिसरीन का इस्तेमाल तो नेचुरल प्रोडक्ट के तौर पर ज्यादा किया जाता है।

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