ममता बनर्जी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस नेताओं की ही सेना खड़ी हो रही है। खबर है कि इस लिस्ट में सांसद सायोनी घोष से लेकर पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान तक का नाम शामिल है। हालांकि, इस लिस्ट को लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि बागी सांसदों का एक समूह पहले ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को समर्थन पत्र सौंप चुका है।
लोकसभा अध्यक्ष के दफ्तर में सौंपे गए इस पत्र में 19 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि इनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदार, डॉ शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष का नाम शामिल है।
इनके अलावा पत्र पर दस्तखत करने वालों में खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मलिया और पार्थ भौमिक भी हैं। लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं कि 20 सांसद टीएमसी से अलग गुट होने का दावा कर सकते हैं। कहा जा रहा था कि एक और वरिष्ठ सांसद के इंतजार के चलते अंतिम सूची तैयार नहीं हो पा रही थी।
राज्यसभा में इस्तीफों का दौर जारी
लोकसभा के अलावा ममता बनर्जी को राज्यसभा में भी लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गुरुवार को ही कोयल मलिक के रूप में पार्टी के चौथे राज्यसभा सांसद ने इस्तीफा दिया है। खास बात है कि महज 4 दिनों में यह पार्टी को झटका लगा है। इसके साथ ही उच्च सदन में पार्टी सांसदों की संख्या घटकर 9 पर आ गई है।
इससे पहले सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश बरेक सांसद पद छोड़ चुके हैं। रे ने टीएमसी के सभी पदों को भी छोड़ दिया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी पर अब अस्तित्व का संकट भी गहराता नजर आ रहा है।
विधानसभा में बढ़े बागी
विधानसभा में बागियों के गुट का समर्थन कर रहे रिताब्रता बनर्जी का कहना है कि उनके गुट में शामिल नेताओं की संख्या बढ़कर 64 हो गई है। खास बात है कि टीएमसी ने चुनाव में 80 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अगर आंकड़ा सटीक साबित होता है, तो पार्टी में महज 16 विधायक ही रह जाएगा। वहीं, संसद के दोनों सदनों में भी सदस्यों का ग्राफ तेजी से घटेगा।
चुनाव चिह्न और नाम जाएगा?
अटकलें लगाई जा रही हैं कि बागी सांसदों का समूह जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग से मुलाकात कर गुट को मान्यता देने की मांग कर सकता है। हालांकि, इसे लेकर औपचारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। अगर ऐसा होता है, तो ममता पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न भी गंवा सकती हैं। ऐसा ही पहले महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के साथ ऐसा हो चुका है।


















