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बंद हो चुका शेयर बाजार फिर होगा जिंदा? 1,749 कंपनियों वाला Calcutta Stock Exchange दोबारा शुरू करने की तैयारी

एक समय था जब कोलकाता का शेयर बाजार देश के सबसे बड़े फाइनेंशियल सेंटर्स में गिना जाता था. हजारों निवेशक, सैकड़ों ब्रोकर और बड़ी संख्या में लिस्टेड कंपनियां यहां कारोबार करती थीं. लेकिन फिर ऐसा दौर आया जब यह शेयर बाजार धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर पहुंच गया. अब एक बार फिर इसकी चर्चा शुरू हो गई है. पश्चिम बंगाल की BJP सरकार ने अपने पहले पूर्ण बजट में Calcutta Stock Exchange यानी CSE को फिर से जीवित करने का प्रस्ताव रखा है. बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने इस दिशा में सरकार की मंशा जाहिर की.लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्टॉक एक्सचेंज ने खुद बाजार से बाहर निकलने के लिए आवेदन कर रखा है, क्या उसे दोबारा जिंदा किया जा सकता है?

आखिर कितना बड़ा था Calcutta Stock Exchange?

आज की युवा पीढ़ी शायद Calcutta Stock Exchange का नाम भी कम सुनती हो, लेकिन एक समय ऐसा था जब यह देश के सबसे प्रभावशाली स्टॉक एक्सचेंजों में गिना जाता था.

अपने सुनहरे दौर में CSE में-1,749 कंपनियां लिस्टेड थीं. 650 रजिस्टर्ड ट्रेडिंग मेंबर्स थे. हजारों निवेशक यहां रोज कारोबार करते थे.

उस दौर में मुंबई के बाहर अगर किसी स्टॉक एक्सचेंज का सबसे ज्यादा प्रभाव था, तो उसमें कोलकाता का नाम जरूर लिया जाता था.

फिर ऐसा क्या हुआ कि सब खत्म हो गया?

किसी भी संस्थान का पतन एक दिन में नहीं होता. Calcutta Stock Exchange के साथ भी यही हुआ.इसके पतन की सबसे बड़ी वजह 2001 का चर्चित केतन पारेख घोटाला माना जाता है.

केतन पारेख घोटाले ने तोड़ दी कमर

साल 2001 में सामने आए केतन पारेख घोटाले ने भारतीय शेयर बाजार को हिला दिया था. इस घोटाले के बाद कई ब्रोकर अपने भुगतान दायित्व पूरे नहीं कर पाए.नतीजा यह हुआ कि सेटलमेंट सिस्टम पर दबाव बढ़ गया.

निवेशकों का भरोसा टूटने लगा. जब निवेशकों का भरोसा खत्म होता है, तो किसी भी स्टॉक एक्सचेंज के लिए टिके रहना मुश्किल हो जाता है.Calcutta Stock Exchange भी इसी संकट से उबर नहीं पाया.

निवेशकों ने बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी

भुगतान संकट के बाद निवेशकों का विश्वास लगातार कम होता गया. ट्रेडिंग वॉल्यूम गिरने लगे.कई ब्रोकर और कंपनियां दूसरे एक्सचेंजों की तरफ जाने लगीं.धीरे-धीरे CSE की बाजार में पकड़ कमजोर होती चली गई.उधर तकनीक के मामले में भी देश के बड़े एक्सचेंज तेजी से आगे बढ़ रहे थे.NSE और BSE का प्रभाव बढ़ता गया जबकि CSE पीछे छूटता गया.

2013 में लगा बड़ा झटका

Calcutta Stock Exchange के लिए सबसे बड़ा झटका अप्रैल 2013 में आया. SEBI ने CSE में ट्रेडिंग को सस्पेंड कर दिया. यानी एक्सचेंज पर सामान्य कारोबार बंद हो गया.

यह फैसला CSE के लिए लगभग जीवन और मृत्यु जैसी स्थिति लेकर आया.क्योंकि किसी भी स्टॉक एक्सचेंज की असली ताकत उसकी ट्रेडिंग गतिविधि ही होती है.

फिर भी बचने की कोशिश जारी रही
ट्रेडिंग बंद होने के बाद भी CSE ने खुद को बचाने की कोशिश जारी रखी. एक्सचेंज ने कई बार नियामकीय शर्तें पूरी करने की कोशिश की. लेकिन समस्या यह थी कि वह SEBI द्वारा तय कई महत्वपूर्ण मानकों को पूरा नहीं कर पा रहा था.

SEBI की शर्तें क्यों पूरी नहीं हो सकीं?
SEBI ने स्टॉक एक्सचेंजों के लिए नेटवर्थ और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन से जुड़े कई नियम बनाए हैं. Calcutta Stock Exchange इन शर्तों को लगातार पूरा करने में संघर्ष करता रहा.यहां तक कि कोलकाता हाई कोर्ट ने फरवरी 2024 और अगस्त 2024 में समय भी दिया.लेकिन इसके बावजूद CSE जरूरी मानकों को पूरा नहीं कर सका.आखिरकार स्थिति ऐसी हो गई कि एक्सचेंज को खुद ही बाहर निकलने का रास्ता चुनना पड़ा.

खुद CSE ने बंद होने के लिए आवेदन किया

यह बात काफी लोगों को चौंका सकती है. जिस एक्सचेंज को अब पुनर्जीवित करने की बात हो रही है, उसी CSE ने 18 फरवरी 2025 को SEBI के पास स्टॉक एक्सचेंज कारोबार से स्वैच्छिक निकास यानी Voluntary Exit के लिए आवेदन किया था.

यानी CSE खुद शेयर बाजार के रूप में अपना काम बंद करना चाहता था. यही वजह है कि पश्चिम बंगाल सरकार की नई योजना को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं.

जमीन बेचने की मंजूरी भी मिल चुकी है
Calcutta Stock Exchange के हालिया कदमों को देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है.SEBI पहले ही CSE को अपनी EM Bypass वाली जमीन बेचने की मंजूरी दे चुका है.

यह जमीन Srijan Group को करीब 253 करोड़ रुपये में बेची जा रही है.आमतौर पर कोई संस्था तब अपनी बड़ी संपत्तियां बेचती है जब वह अपने संचालन मॉडल में बड़ा बदलाव कर रही हो या कारोबार समेट रही हो.

कर्मचारियों को भी दी जा चुकी है VRS
सिर्फ जमीन ही नहीं, CSE ने कर्मचारियों के लिए Voluntary Retirement Scheme यानी VRS भी लागू की.इस योजना के तहत करीब 20.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया.सबसे दिलचस्प बात यह रही कि सभी कर्मचारियों ने VRS स्वीकार कर लिया.यानी एक्सचेंज के पास अब नियमित कर्मचारी भी नहीं बचे.

अब सबसे बड़ा सवाल…

जब एक्सचेंज ने
खुद बंद होने का आवेदन कर दिया
जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी
सभी कर्मचारियों को VRS दे दिया

तो फिर इसे दोबारा शुरू कैसे किया जाएगा?
यही सवाल अब बाजार में सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है.क्या सच में फिर से जिंदा हो सकता है CSE?सैद्धांतिक रूप से किसी भी संस्थान को दोबारा खड़ा किया जा सकता है.लेकिन स्टॉक एक्सचेंज चलाना सिर्फ एक इमारत या ब्रांड का नाम बचा लेने से संभव नहीं होता.

इसके लिए चाहिए:

मजबूत तकनीकी प्लेटफॉर्म
क्लियरिंग सिस्टम
पर्याप्त नेटवर्थ
SEBI की मंजूरी
ट्रेडिंग मेंबर्स
निवेशकों का भरोसा

और सबसे महत्वपूर्ण, कारोबार का पर्याप्त वॉल्यूम.

पश्चिम बंगाल सरकार का मकसद क्या हो सकता है?सरकार संभवतः कोलकाता को फिर से एक वित्तीय केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है.एक समय CSE पूर्वी भारत की आर्थिक पहचान हुआ करता था.संभव है कि सरकार उसी विरासत को दोबारा जीवित करने की कोशिश कर रही हो.हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इसका मॉडल क्या होगा और इसे किस तरह लागू किया जाएगा.

आगे क्या होगा?
फिलहाल एक तरफ पश्चिम बंगाल सरकार Calcutta Stock Exchange को पुनर्जीवित करने की बात कर रही है. दूसरी तरफ CSE पहले ही SEBI के पास स्वैच्छिक निकास के लिए आवेदन कर चुका है.

यानी कहानी अभी पूरी तरह खुली नहीं है.लेकिन इतना जरूर है कि एक समय 1,749 कंपनियों और 650 ट्रेडिंग मेंबर्स वाले इस ऐतिहासिक स्टॉक एक्सचेंज का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

अब निवेशकों, बाजार विशेषज्ञों और वित्तीय जगत की नजर इस बात पर होगी कि क्या Calcutta Stock Exchange सच में दूसरा जीवन पा सकेगा या यह सिर्फ एक बजटीय घोषणा बनकर रह जाएगी.

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