मेदिनीनगर। झारखंड के पलामू जिले में 10 दिनों के भीतर एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत के मामले में प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बीमार होने पर परिवार के सदस्य इलाज के साथ-साथ झाड़-फूंक और तांत्रिक पर भरोसा कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर ओझा के कहने पर परिवार के लोग राख का सेवन कर रहे थे, जिससे उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए विसरा और अन्य नमूनों की जांच कराई जा रही है। फिलहाल परिवार के तीन अन्य सदस्य अस्पताल में भर्ती हैं और उनका उपचार जारी है।
डॉक्टरों ने जताई कई आशंकाएं
पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि परिवार को कई बार अस्पताल में नियमित इलाज कराने की सलाह दी गई थी, लेकिन वे चिकित्सा के साथ-साथ झाड़-फूंक का भी सहारा लेते रहे। राख खाने की जानकारी मिलने के बाद उसके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
डॉक्टरों ने यह भी कहा कि प्रारंभिक स्तर पर ड्रॉप्सी जैसी बीमारी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से परिवार द्वारा इस्तेमाल किए गए सरसों के तेल समेत अन्य खाद्य सामग्री के नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
10 दिनों में परिवार के पांच लोगों की मौत
यह मामला पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव का है। जानकारी के अनुसार, परिवार के मुखिया कुलदीप महतो की 19 जून को मौत हुई। अगले दिन उनकी एक बेटी ने भी दम तोड़ दिया।
इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य इलाज के साथ-साथ लेस्लीगंज के पूर्णाडीह इलाके में झाड़-फूंक कराने जाते रहे। इसी दौरान कथित तौर पर वे राख का सेवन भी करते रहे। बाद में 26 जून को कुलदीप महतो की दूसरी बेटी इंदु कुमारी, 28 जून को बहू श्वेता कुमारी और 29 जून को बेटे नकुल महतो की रांची स्थित रिम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिलहाल किसी एक कारण को मौत की वजह मानना जल्दबाजी होगी। विसरा, राख और अन्य नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का खुलासा हो सकेगा। प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है।


















