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Chhattisgarh News: पुराने निरस्त आदेश की तारीख से वरिष्ठता का दावा नहीं: हाईकोर्ट

Chhattisgarh News:  बिलासपुर। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि, यदि कोई प्रारंभिक पदोन्नति आदेश अनियमितताओं के कारण निरस्त कर दिया गया हो, तो कर्मचारी बाद में नए सिरे से मिले प्रमोशन के बाद पुराने निरस्त आदेश की तारीख से वरिष्ठता का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने सूरजपुर जिले के पांच मिडिल स्कूल प्रधानपाठकों की याचिका को आधारहीन पाते हुए खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता शोभनाथ चौबे, अशोक कुमार उपाध्याय, दिनेश कुमार द्विवेदी, संजय कुमार त्रिपाठी और दिनेश कुमार कौशिक सूरजपुर जिले के विभिन्न शासकीय पूर्व माध्यमिक शालाओं में प्रधानपाठक के पद पर कार्यरत हैं। Also Read: छत्तीसगढ़ में आज से महंगी हुई बिजली, नई दरें लागू

 इन शिक्षकों को पहली बार 7 सितंबर 2012 को प्रधानपाठक के पद पर पदोन्नत किया गया था और उन्होंने ज्वाइनिइंग भी कर ली थी। पदोन्नति प्रक्रिया में कुछ गड़बड़‌यों और विसंगतियों की शिकायत के बाद, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के कमिश्नर के निर्देश पर कलेक्टर सूरजपुर ने जांच कराई। इसके बाद 21 सितंबर 2012 को इस प्रमोशन आर्डर को रद्द कर दिया गया था। विसंगतियों को दूर करने के बाद याचिकाकर्ताओं को 19 सितंबर 2013 को दोबारा फ्रेश आर्डर के जरिए हेड मास्टर पद पर प्रमोट किया गया। याचिकाकर्ताओं ने संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा उनके दावे को खारिज करने वाले आदेश को चुनौती दी थी। उनकी मांग थी कि उन्हें उनके पहले प्रमोशन आदेश यानी 7 सितंबर 2012 से ही वरिष्ठता का लाभ दिया जाए।


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