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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बीएससी नर्सिंग प्रवेश में 10 परसेंटाइल की शर्त रद्द

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निजी नर्सिंग कॉलेजों में बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए राज्य सरकार द्वारा लागू की गई न्यूनतम 10 परसेंटाइल की पात्रता को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय कानून के तहत गठित इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों और छूट में राज्य सरकार अपने स्तर पर कोई अतिरिक्त शर्त नहीं जोड़ सकती। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि आईएनसी की गाइडलाइन के अनुरूप केवल मेरिट के आधार पर 15 दिनों के भीतर नई काउंसलिंग कराई जाए। जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन सहित अन्य याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। मामला शैक्षणिक सत्र 2025-26 में बीएससी नर्सिंग प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ा था।

 आईएनसी की छूट के बावजूद लगाई गई थी नई शर्त

शुरुआत में आईएनसी के नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए 50, दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) के लिए 45 तथा एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए 40 परसेंटाइल अनिवार्य था। पहली काउंसलिंग के बाद राज्य की 7,811 सीटों में से 4,147 सीटें खाली रह गईं। इसके बाद राज्य के चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (डीएमई) ने 28 नवंबर 2025 को आईएनसी से परसेंटाइल की अनिवार्यता समाप्त करने का अनुरोध किया। आईएनसी ने 29 दिसंबर 2025 को अनुरोध स्वीकार करते हुए खाली सीटें भरने के लिए परसेंटाइल की शर्त पूरी तरह हटा दी। इसके बावजूद राज्य के चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने उसी दिन आदेश जारी कर दिया कि केवल 10 परसेंटाइल या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी ही नई काउंसलिंग में शामिल हो सकेंगे। इस अतिरिक्त शर्त के कारण करीब 2,000 से अधिक सीटें फिर भी खाली रह गईं।

 राज्य सरकार अतिरिक्त शर्त नहीं जोड़ सकती

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनुराग दयाल ने तर्क दिया कि नर्सिंग शिक्षा के मानक तय करने और उनमें छूट देने का अधिकार केवल आईएनसी के पास है। राज्य सरकार कार्यकारी आदेश के जरिए नए पात्रता मानदंड लागू नहीं कर सकती।

 हाईकोर्ट ने इस दलील से सहमति जताते हुए कहा कि केंद्रीय कानून के तहत गठित वैधानिक संस्था द्वारा निर्धारित मानकों में राज्य सरकार किसी प्रकार का बदलाव नहीं कर सकती। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ‘मां वैष्णो देवी महिला महाविद्यालय’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा के मानक तय करने या उनमें छूट देने का अधिकार केवल विशेषज्ञ केंद्रीय संस्था के पास है, जबकि राज्य सरकार की भूमिका केवल उन्हें लागू करने तक सीमित है। फैसले के तहत राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि बिना किसी न्यूनतम परसेंटाइल की बाध्यता के, केवल मेरिट के आधार पर 15 दिनों के भीतर नई प्रवेश काउंसलिंग आयोजित कर रिक्त सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाए।

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