रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के सरकारी दावों के बावजूद तहसीलों और राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेशभर में 1,09,416 राजस्व प्रकरण लंबित हैं, जबकि अकेले रायपुर जिले में लंबित मामलों की संख्या 4,295 तक पहुंच गई है। इनमें कई ऐसे मामले भी शामिल हैं जो 15 से 19 वर्ष पुराने होने के बावजूद अब तक अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 28,34,293 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनमें से बड़ी संख्या का निराकरण हो चुका है, लेकिन हजारों मामले अभी भी लंबित हैं। वहीं 2,250 प्रकरण स्थगित हैं, जिनमें रायपुर जिले के 158 मामले शामिल हैं।
19 साल से फैसले का इंतजार
सबसे गंभीर स्थिति कलेक्टर न्यायालय की है, जहां वर्ष 2007-08 में दर्ज एक मामला 19 साल बाद भी प्रक्रियाधीन है। 2008-09 के एक अन्य मामले में 10 बार आदेश-पत्र (ऑर्डरशीट) जारी होने के बावजूद जांच शुरू नहीं हो सकी। वहीं 2009-10 में दर्ज एक प्रकरण में 16 वर्षों के दौरान केवल सात ऑर्डरशीट जारी हुईं और अब तक अंतिम फैसला नहीं हो पाया।
एसडीएम और तहसील अदालतों में बढ़ा बोझ
रायपुर जिले में सबसे अधिक लंबित मामले एसडीएम रायपुर न्यायालय में हैं। यहां कुल 29,928 मामलों में से 29,502 का निराकरण हुआ, जबकि 426 मामले लंबित हैं। इसके अलावा तहसीलदार रायपुर न्यायालय में 270, अपर कलेक्टर (राजस्व) के यहां 400 से अधिक और कलेक्टर न्यायालय में 294 प्रकरण लंबित हैं। तहसील स्तर पर भी लंबित मामलों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है। गोबरा-नवापारा तहसील में 287, मंदिर हसौद में 255, अभनपुर एसडीएम में 214, आरंग एसडीएम में 212, आरंग तहसील में 157, धरसींवा तहसील में 126 तथा तिल्दा तहसील में 98 मामले अभी भी लंबित हैं।
जमीन से जुड़े मामलों में भटक रहे लोग
लंबित मामलों के कारण नागरिकों को नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए वर्षों तक राजस्व न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। प्रकरणों की सुनवाई में लगातार हो रही देरी से आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।


















