बिलासपुर: जन्म प्रमाण पत्रों में आई तकनीकी और प्रशासनिक खामियों से नागरिकों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं। अक्टूबर 2023 के बाद से ऑनलाइन जन्म पंजीयन अनिवार्य हो जाने के बावजूद, पुराना ऑफलाइन प्रमाण पत्र अब भी मान्य है, लेकिन चिप्स के फरमान और जुर्माने का डर सच्चाई बनकर सामने आया है। इन कारणों से पंचायत व नगर निगम कार्यालयों में रिकॉर्ड का अभाव हो गया है, जिससे सैकड़ों आवेदन लंबित पड़े हैं और आम जनता को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। कलेक्टर ने इन गंभीर समस्याओं को देखते हुए सभी 15 पंचायत सचिवों को तलब कर जवाब तलब किया है। यह समस्या पूरे प्रदेश में व्याप्त है और सरकार व प्रशासन को इन खामियों को दूर करने के लिए त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है। नागरिकों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना ही इन समस्याओं का समाधान हो सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन जटिलताओं को कैसे समाप्त करता है और नागरिकों को राहत प्रदान करता है।
पुराने रिकॉर्ड का अभाव और सचिवों की लापरवाही से समस्या विकराल
नगर निगम में शामिल 15 ग्राम पंचायतों का रिकार्ड न मिलने और सचिवों द्वारा हैंडओवर में हुई चूक के कारण, नागरिकों के आवेदन अटके हुए हैं। इस स्थिति से न केवल जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे आवश्यक सेवाओं में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ऑनलाइन पंजीयन और मान्यताएं: प्रक्रिया में जटिलताएं
अक्टूबर 2023 के बाद से जन्म प्रमाण पत्रों का ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बावजूद, पुराने ऑफलाइन प्रमाण पत्र को मान्यता दी गई है, लेकिन चिप्स और जुर्माने के डर से कई चॉइस सेंटर संचालक नए प्रमाण पत्र अपलोड करने से हिचकिचा रहे हैं। इस कारण, आधार बनवाने और अपडेट कराने में बाधाएं खड़ी हो रही हैं।
स्कूल प्रवेश और अभिभावकों की मुश्किलें
ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र न होने के कारण, कई अभिभावक स्कूल प्रवेश के समय परेशान हो रहे हैं। उन्हें सरकारी कार्यालयों में चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी हो रही है। इसके साथ ही, कई जिलों में बच्चों के लिए वैकल्पिक रास्ता न मिल पाने की स्थिति भी उभर रही है।
शिकायतें और समाधान की प्रक्रिया में खामियां
सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतें तो बढ़ रही हैं, लेकिन अभी तक इनका समाधान नहीं हो पाया है। अधिकारी भी प्रक्रिया में जटिलता और चिप्स के स्तर पर स्पष्ट व्यवस्था न होने का हवाला दे रहे हैं। इससे नागरिकों का भरोसा भी कम होता जा रहा है।


















