ब्रेकिंग खबरें

छत्तीसगढ़रायपुर संभाग

वकीलों ने जोड़ दिया टूटा रिश्ता: दो साल से अलग रह रहे पति-पत्नी आए साथ

रायपुर। कुटुंब न्यायालय रायपुर में लंबे समय से चल रहा एक पारिवारिक विवाद दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की सकारात्मक पहल और आपसी संवाद से सुलझ गया। वर्ष 2024 से घरेलू विवाद के कारण अलग-अलग रह रहे पति-पत्नी ने अपने तीन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को प्राथमिकता देते हुए सभी मतभेद भुलाकर पुनः साथ रहने का निर्णय लिया।

यह प्रकरण प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय विवेक तिवारी की अदालत में लंबित था। आवेदिका पत्नी ने अपने तथा तीन बच्चों के भरण-पोषण के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 144 के तहत प्रति माह 25 हजार रुपए भरण-पोषण राशि की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया था। दोनों का विवाह 23 अप्रैल 2016 को रायपुर में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। वैवाहिक जीवन में उन्हें तीन संतानें हुईं। पत्नी ने अपने आवेदन में पति पर शराब के नशे में गाली-गलौज, दहेज की मांग, विवाद करने और इलाज नहीं कराने जैसे आरोप लगाए थे।

वहीं पति का कहना था कि पत्नी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करती थी और पारिवारिक विवाद के चलते वह स्वयं बच्चों को लेकर मायके चली गई थी। मामले में आवेदिका की ओर से अधिवक्ता विजय लक्ष्मी वर्मा तथा अनावेदक की ओर से अधिवक्ता भगवानू नायक, उर्वशी घोषपाल और पारसमणि नायक ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने न्यायालयीन संघर्ष के बजाय आपसी संवाद और सुलह का रास्ता अपनाने का प्रयास किया। लगातार समझाइश और सकारात्मक बातचीत के बाद पति-पत्नी अपने मतभेद दूर करने पर सहमत हो गए। इसके बाद आवेदिका ने 23 जून 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत अपनी याचिका वापस ले ली और दोनों ने पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। दोनों पक्ष आर्थिक रूप से कमजोर हैं और तीन बच्चों के पालन-पोषण व शिक्षा की जिम्मेदारी को देखते हुए यह समझौता पूरे परिवार के हित में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

What's your reaction?

Related Posts