रायपुर। जल जीवन मिशन के तहत निर्माण कार्यों का भुगतान लंबे समय से लंबित रहने के मुद्दे पर प्रदेश की निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों का आंदोलन अब दूसरे चरण में प्रवेश करने जा रहा है। मानसून सत्र के दौरान ठेकेदारों ने 17 जुलाई को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। इसके लिए सभी जिलों में कार्यरत निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों से राजधानी रायपुर पहुंचने की अपील की गई है।
निर्माण एजेंसियों का कहना है कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का भुगतान पिछले करीब डेढ़ वर्ष से नहीं हुआ है। भुगतान अटकने के कारण कई परियोजनाओं की रफ्तार थम गई है, जबकि अनेक एजेंसियां आर्थिक संकट और बढ़ते कर्ज के बोझ से जूझ रही हैं। हाल के दिनों में कर्ज के दबाव में तीन ठेकेदारों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं के बाद आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया है।
ठेकेदारों की प्रमुख मांग है कि राज्य सरकार लंबित भुगतान तत्काल जारी करे, अनुबंध के अनुसार नियमित रनिंग बिलों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराए तथा अनुबंध के विपरीत लागू की गई शर्तों को समाप्त करे। उनका आरोप है कि अतिरिक्त शर्तें लगाकर भुगतान रोका जा रहा है।
छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला के अनुसार, प्रदेशभर में जल जीवन मिशन से जुड़ी निर्माण एजेंसियों का लगभग 2200 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि विभागीय स्तर पर निर्णय नहीं होने से एजेंसियां आर्थिक रूप से टूट रही हैं और निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों को भी इस संबंध में लिखित जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद कोई पहल नहीं होने पर पहले 6 जुलाई को नीर भवन का घेराव किया गया था। अब आंदोलन के अगले चरण के तहत 17 जुलाई को सुबह 11 बजे विभिन्न ठेकेदार संगठनों के संयुक्त बैनर तले विधानसभा घेराव के लिए कूच किया जाएगा।


















