नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को विशेष जांच टीम (एसआईटी) को जांच में तेजी लाने और इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जांच को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से जांच की प्रगति से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने को कहा है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच जल्द से जल्द पूरी कर तार्किक परिणति तक पहुंचनी चाहिए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि एसआईटी की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले चढ़ावे और दान के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
भविष्य में चढ़ावे के प्रबंधन पर भी नजर
सुप्रीम कोर्ट का जोर केवल मौजूदा आरोपों की जांच तक सीमित नहीं है। अदालत यह भी देख सकती है कि भविष्य में मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान की व्यवस्था को किस तरह अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन तथा खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। हालांकि सोमवार की सुनवाई में अदालत ने फिलहाल एसआईटी की जांच की प्रगति पर नजर रखने का रास्ता अपनाया है। सीलबंद रिपोर्ट मिलने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट आगे के निर्देशों पर फैसला करेगा।
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पहले ही सौंपी जा चुकी
मामले में उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आवश्यक कार्रवाई के लिए सौंप दी है। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के मामले में हस्तक्षेप से पहले गठित एसआईटी ने तैयार की थी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली टीम में आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार शामिल थे।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई।
जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विभिन्न पक्षों की ओर से जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता बेहतर बनाने के लिए दिए गए सुझावों पर एसआईटी को वस्तुनिष्ठ तरीके से विचार करना चाहिए। अदालत के निर्देश के बाद अब एसआईटी की जांच रिपोर्ट और उसकी प्रगति पर सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल अदालत ने जांच को जल्द पूरा करने और स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे किस प्रकार की न्यायिक निगरानी या अन्य निर्देश आवश्यक हैं।


















