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हेडमास्टर को बना दिया सहायक शिक्षक! ट्रांसफर की गलती पर हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग को फटकारा

छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक लापरवाही और दस्‍तावेजों की बिना जांच के जल्‍दबाजी में किए जाने वाले तबादलों को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्‍पणी की है. अदालत ने एक मामले में सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही को पकड़ा है, जहां प्रधानाध्‍यापक (हेडमास्‍टर) को गलती से सहायक शिक्षक मानकर जारी किए गए स्‍थानांतरण आदेश को निरस्‍त कर दिया गया है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने खुद इस लापरवाही को स्‍वीकार किया है.

विभाग ने बताया कि यह एक प्रशासनिक भूल थी, जिसके आधार पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बड़ी राहत दी है. इस पूरे मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड संधारण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

शि‍क्षा विभाग ने जारी किया आदेश

याचिकाकर्ता ने दूज बाई कंवर धमतरी जिले के कुरूद ब्लॉक के तहत आने वाले शासकीय प्राथमिक स्‍कूल, बिछपारा परखंडा में प्रधानाध्‍यापक (हेडमास्‍टर) के पद पर लंबे समय से कार्यरत हैं. राज्य शासन के स्‍कूल शिक्षा विभाग ने हेडमास्‍टर के स्‍थानांतरण का आदेश 6 अगस्‍त को जारी कर दिया. इस आदेश के आने के बाद तबादला शासकीय प्राथमिक स्‍कूल, लाडेर(ब्लॉक मगरलोड जिला धमतरी) कर दिया गया था.

हाई कोर्ट में हुई मामले की सुनवाई

पूरे मामले पर याचिकाकर्ता ने आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मामले की सुनवाई पर न्‍यायमूर्ति बिभु दत्त गुरू की एकलपीठ ने 21 अगस्‍त को फैसला सुनाया. याचिकाकार्ता के वकील ने हाई कोर्ट के सामने अपनी दलील पेश की और बताया कि विभाग ने न केवल इस आदेश में उनका पद गलत दर्शाया है, बल्कि भारी प्रशासनिक चूक भी की है.

आदेश में हुई गलती

सरकार के आदेश में में एक वरिष्ठ प्रधानाध्‍यापक को ‘सहायक शिक्षक’ के रूप में दर्शाया गया था.
आदेश में जिस स्‍कूल में उनका तबादला हुआ था, वहां पहले से ही एक प्रधानध्‍यापक उपलब्ध थे, जिसके चलते वहां उनके पद के अनुरूप कोई भी पद उनके पदभार के अनुसार उपलब्ध नहीं था.

हाई कोर्ट में सरकार ने मानी गलती

हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता ने न्‍यायालय के समक्ष स्‍पष्ट किया कि विभाग की प्रशासनिक भूल और रिकॉर्ड के चलते त्रुटि हुई, जिसके कारण दूज बाई कंवर को सहायक शिक्षक मानकर तबादला आदेश जारी किया था.

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की दलील सुनने के बाद माना की य‍ाचि‍काकर्ता की याचिका में जो बताया गया है वहा सही है और विभाग ने उनकी वास्‍तविक पदस्थि‍ति और कार्यभार की स्थित पर बिना कोई विचार किए आदेश जारी किया था. कोर्ट ने 6 अगस्‍त को जारी किए इस स्‍थानांतरण आदेश को याचिकाकर्ता की सीमा तक निरस्‍त कर दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि विभाग नियमों और वास्‍तविक खाली पदों के आधार पर नया स्‍थानांतरण आदेश जारी कर सकता है.

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