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गढ़चिरौली में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, जंगल में छिपाकर रखा विस्फोटक बरामद

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से सटे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सलवाद भले ही खत्म हो चुका है, लेकिन नक्सलियों द्वारा जंगलों में छिपाकर रखा गया विस्फोटक सामान अब भी सुरक्षा बलों और आम लोगों के लिए खतरा बना हुआ था। इसी खतरे को देखते हुए गढ़चिरौली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जमीन में छिपाकर रखा गया भारी मात्रा में विस्फोटक सामान बरामद किया है।

पुलिस की इस कार्रवाई से जंगल में छिपे विस्फोटक के कारण होने वाली संभावित बड़ी अनहोनी टल गई है। माना जा रहा है कि नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने या किसी अन्य वारदात को अंजाम देने के उद्देश्य से यह सामान जमीन के नीचे छिपाकर रखा था।

नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी बना हुआ था खतरा

गढ़चिरौली और आसपास के जंगल लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के केंद्र रहे हैं। नक्सलवाद के कमजोर पड़ने और उसके खात्मे के बाद भी जंगलों में पहले से छिपाकर रखे गए विस्फोटक और अन्य सामग्री सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए हैं।

पुलिस ने चलाया विशेष अभियान

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पोस्टे गैरापत्ती हद के टव्वे जंगल इलाके में नक्सलियों ने विस्फोटक सामान छिपाकर रखा है. सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई. पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मार्गदर्शन में विशेष अभियान चलाया गया. इस अभियान में विशेष अभियान दल गढ़चिरौली और प्राणहिता की 4 टुकड़ियां और बीडीडीएस की 2 टीमें शामिल थीं. सभी टीमें सर्च अभियान पर रवाना हुईं.▶ Vistaar News YouTube

पुलिस ने कई विस्फोटक सामग्री की जब्त

जंगल का इलाका काफी घना और कठिन थाय इसके बावजूद जवानों ने बारीकी से एक-एक जगह की तलाशी ली. काफी देर तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद आखिरकार पुलिस को वह जगह मिल गई, जहां नक्सलियों ने विस्फोटक सामान छिपाकर रखा था. जमीन के नीचे दबाकर रखे गए सामान को बाहर निकाला गया तो पुलिस भी हैरान रह गई. तलाशी के दौरान मौके से विस्फोटक बनाने और हमला करने में इस्तेमाल होने वाला सामान मिला है.

इसमें विस्फोटक के लिए इस्तेमाल होने वाले 11 कुकर, कॉर्टेक्स वायर के 3 बंडल जो करीब 100 फुट लंबे हैं, 3 किलो गन पाउडर, 4 डेटोनेटर, 1 बैटरी, 250 ग्राम पटाखा बारूद, 4 स्टील कंटेनर, 8 वायर बंडल, 1 सोलर प्लेट और अन्य नक्सली सामान शामिल है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नक्सली इस सामान का इस्तेमाल नक्सल सप्ताह और चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों पर हमला करने के लिए करते हैं. वे जंगल में इस तरह का सामान पहले से ही छिपाकर रखते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके. इस बार भी उनकी यही योजना थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते यह नाकाम हो गई.

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