ब्रेकिंग खबरें

छत्तीसगढ़

Tata Power Solar के फेक ऐड से लगाया चूना, 11 लाख की साइबर ठगी में 2 गिरफ्तार

राजनांदगांव साइबर पुलिस को साइबर ठगी के एक बड़े मामले में सफलता मिली है। इंस्टाग्राम पर Tata Power Solar कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का झांसा देकर 11 लाख 36 हजार रुपये की धोखाधड़ी करने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने बिहार के बोधगया से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी किराये के मकान में बैठकर देशभर में साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए लोगों को Tata Power Solar कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने का भरोसा दिलाया था। कंपनी का अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का लालच देकर पीड़ित से अलग-अलग माध्यमों से कुल 11.36 लाख रुपये ठग लिए गए।

बोधगया में किराये के मकान से चला रहे थे नेटवर्क

मामले की शिकायत मिलने के बाद राजनांदगांव साइबर पुलिस ने जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच के दौरान उनके बिहार के बोधगया में होने की जानकारी मिली।

इसके बाद पुलिस टीम ने वहां कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी किराये के मकान में रहकर देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को निशाना बना रहे थे।

कैसे करते थे ठगी?

आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर Tata Power Solar में डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम से फर्जी विज्ञापन लिंक बनाया था. इस लिंक पर नाम, पता, मोबाइल नंबर और ईमेल भरते ही पूरा डाटा आरोपियों के पास पहुंच जाता था. फिर आरोपी खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताकर फोन करते थे और डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का झांसा देते थे.

भरोसा जीतने के लिए कंपनी के नाम से फर्जी दस्तावेज बनाकर ईमेल पर भेजते थे. फिर रजिस्ट्रेशन शुल्क, सोलर सिस्टम मशीन की अग्रिम कीमत और अधिकारियों के आने-जाने के खर्च के नाम पर अलग-अलग किश्तों में पैसे जमा करवा लेते थे.

11 लाख 36 हजार की ठगी

व्यक्ति से जुलाई और अगस्त 2026 में अलग-अलग किश्तों में कुल 11,36,123 रुपये की ठगी की गई. साइबर थाना राजनांदगांव में अपराध क्रमांक 03/2026 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया.

फर्जी सिम और म्यूल खातों का खेल

ठगी की रकम के लिए आरोपी पश्चिम बंगाल के कोलकाता से कमीशन पर फर्जी सिम और बैंक खाते लेते थे. रकम इन्हीं म्यूल खातों में जमा कराई जाती थी, फिर ATM और फोन पे से निकाल ली जाती थी. रकम को दोनों आरोपी आपस में और अन्य सहयोगियों के साथ कमीशन पर बांटते थे.

What's your reaction?

Related Posts