तलाक के बाद मां के साथ रह रही नाबालिग बेटी का पासपोर्ट बनवाने के लिए पिता की सहमति अनिवार्य नहीं है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि जब तलाक की डिक्री में बच्चे की कस्टडी मां को सौंपी गई हो और पिता को इस व्यवस्था पर कोई आपत्ति नहीं हो, तो पासपोर्ट प्राधिकरण केवल पिता की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं मिलने के आधार पर आवेदन खारिज नहीं कर सकता। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने सान्वी आनंद की याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित प्राधिकरण को चार सप्ताह के भीतर पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया है।
मां को मिली थी बेटी की कस्टडी
मामले में तलाक के बाद नाबालिग बेटी की कस्टडी मां को दी गई थी। ऐसे में मां अपनी बेटी का पासपोर्ट बनवाना चाहती थीं। हालांकि, पासपोर्ट आवेदन की प्रक्रिया में पिता की NOC नहीं मिलने के कारण परेशानी सामने आई। इसके बाद मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ता ने अदालत से पासपोर्ट जारी कराने के लिए हस्तक्षेप की मांग की।
बिलासपुर निवासी आकांक्षा आनंद (दुआ) की शादी 20 जून 2014 को वरुण आनंद से हुई थी। उनकी बेटी सान्वी का जन्म 27 अक्टूबर 2020 को हुआ। दोनों का 9 मई 2025 को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत तलाक हो गया। तलाक की डिक्री में बेटी की कस्टडी मां को सौंपी गई और पिता को केवल मिलने का अधिकार दिया गया। पिता ने भी बेटी के मां के साथ रहने पर आपत्ति नहीं जताई थी।
मां ने 13 दिसंबर 2025 को बेटी के पासपोर्ट के लिए आवेदन किया, लेकिन 18 सितंबर 2026 को क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय रायपुर ने पिता की अनापत्ति नहीं मिलने पर आवेदन खारिज कर दिया। मां ने बताया कि उन्हें पूर्व पति के वर्तमान ठिकाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने पासपोर्ट नियमों के तहत अनुलग्नक-सी में एकल अभिभावक की घोषणा भी प्रस्तुत की थी।
एकल अभिभावक को घोषणा पत्र देने का अधिकार
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भारत ने तर्क दिया कि नियमों में एक अभिभावक को दूसरे की सहमति नहीं मिलने पर निर्धारित घोषणा के आधार पर आवेदन करने की व्यवस्था है। केंद्र सरकार ने दोनों अभिभावकों की सहमति को बच्चे के हित और कस्टडी विवादों से बचाव के लिए जरूरी बताया।
विदेश यात्रा व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
हाई कोर्ट ने गुजरात, बॉम्बे, केरल और इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसलों के साथ सुप्रीम कोर्ट के मेनका गांधी मामले का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत विदेश यात्रा का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। पासपोर्ट अधिनियम की धारा 6 में पिता की सहमति नहीं मिलने को पासपोर्ट अस्वीकार करने का आधार नहीं बनाया गया है। परिस्थितियों और बच्चे के हितों की अनदेखी कर नियमों का यांत्रिक पालन उचित नहीं है।
चार सप्ताह में जारी करना होगा पासपोर्ट
हाई कोर्ट ने पासपोर्ट कार्यालय की 18 सितंबर 2026 की कार्रवाई को मनमाना और कानून के अनुरूप नहीं माना। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जरूरी अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर नाबालिग सान्वी आनंद का पासपोर्ट पिता की सहमति के बिना जारी किया जाए।


















