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नरक चतुर्दशी पर 14 दीयों का खास महत्व, यमराज से जुड़ी है सदियों पुरानी मान्यता

दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध करने की कथा का स्मरण किया जाता है। नरक चतुर्दशी पर दीपदान की भी विशेष परंपरा है। आज 7 नवंबर 2026, दिन शनिवार को छोटी दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन 14 दीपक जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। इन दीपकों को 14 लोकों और पितरों से जुड़ी मान्यताओं के साथ भी जोड़कर देखा जाता है। आइए जानते हैं छोटी दिवाली पर 14 दीपक जलाने का धार्मिक महत्व और इससे जुड़े नियम।

नरक चतुर्दशी पर 14 दीपक जलाने की परंपरा क्यों?

नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन 14 दीपक जलाने की परंपरा प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं में 14 की संख्या को ब्रह्मांड के 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, इनमें सात ऊपरी लोक और सात निचले लोक शामिल हैं। दीपक जलाना इन सभी लोकों में प्रकाश और मंगल की कामना का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।

यमराज के नाम दीपदान करने का क्या है महत्व?

नरक चतुर्दशी पर यमराज के लिए दीपक जलाने की परंपरा को यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर धर्मराज से परिवार की लंबी आयु और सुरक्षा की प्रार्थना करनी चाहिए। धार्मिक ग्रंथों में यमराज को न्याय और मृत्यु का देवता माना गया है। इसलिए उनके निमित्त दीपदान को विशेष पुण्यदायी बताया गया है। कुछ परंपराओं में मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यमराज की कृपा से परिवार पर आने वाले संकट दूर रहते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

पितरों के लिए दीपक जलाने की भी है परंपरा

नरक चतुर्दशी पर यमराज के साथ पितरों के नाम से भी दीपदान करने की मान्यता है। हिंदू परंपरा में दक्षिण दिशा को पितरों से जुड़ा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि दीपक जलाकर पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट की जाती है। कुछ परिवार घर के बाहर, दक्षिण दिशा में या पीपल के पेड़ के पास पितरों के निमित्त दीपक जलाते हैं। इस दौरान पूर्वजों का स्मरण करके परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। इसे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम भी माना जाता है।

घर के किन स्थानों पर जलाएं 14 दीपक?

परंपरा के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाए जाते हैं। मुख्य द्वार पर यमराज के नाम का दीपक रखा जाता है, जबकि तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है। रसोई में दीपक जलाकर मां अन्नपूर्णा का स्मरण किया जाता है। इसके अलावा घर की दक्षिण दिशा, पूजा स्थल, आंगन, बालकनी और छत पर भी दीपक रख सकते हैं। घर के कोनों और उन स्थानों पर भी दीपक जलाना चाहिए, जहां सामान्य दिनों में अंधेरा रहता है। दीपक रखते समय सुरक्षा का ध्यान जरूर रखें।

दीपदान करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

नरक चतुर्दशी पर दीपदान करते समय साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दीपक में सरसों या तिल का तेल का इस्तेमाल अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कर सकते हैं। यमराज के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में रखते समय उनका स्मरण करें और परिवार की लंबी आयु की प्रार्थना करें।

पितरों के लिए दीपक जलाते समय भी पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करें। ध्यान रखें कि दीपक पर्दों, कागज और अन्य ज्वलनशील चीजों से दूर सुरक्षित स्थान पर रखा हो। इस दिन दीपदान का मुख्य भाव परिवार की मंगलकामना और पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करना है।

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