हिंदू पंचांग के अनुसार सोमवती अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस बार सोमवती अमावस्या पर एक साथ कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन 4 शुभ योग बनने से इसका महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ और पितरों का स्मरण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा, व्रत और पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से इस दिन धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
पंचांग के अनुसार सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार को रहेगी। दरअसल, अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से शुरू हो गई थी और 15 जून को सुबह 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। हिंदू पंचांग में सूर्योदय के समय जो तिथि रहती है, उसी के आधार पर व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इसी वजह से इस बार सोमवती अमावस्या 15 जून को मानी जाएगी।
सोमवार की वजह से बढ़ जाता है महत्व
अमावस्या हर महीने आती है, लेकिन जब यह सोमवार को पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन को खास माना गया है। बड़ी संख्या में लोग इस दिन भगवान शिव की पूजा करते हैं। कई महिलाएं व्रत भी रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और दान करने से शुभ फल मिलता है। यही वजह है कि हर साल सोमवती अमावस्या पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है।
सुबह करें स्नान और पूजा
सोमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। कई लोग इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा भी करते हैं। वहीं पितरों के निमित्त तर्पण करने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है।
स्नान-दान का विशेष महत्व
धार्मिक ग्रंथों में भी सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य और पितरों के लिए तर्पण करने से शुभ फल मिलता है। पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा भी इस दिन खास मानी जाती है। भगवान कृष्ण ने गीता में पीपल को अपना स्वरूप बताया है, इसलिए इसकी पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।
क्या नहीं करना चाहिए?
इस दिन क्रोध और विवाद से बचने की सलाह दी जाती है। किसी का अपमान न करें और गलत संगति से दूर रहें। इस दिन मांस और मदिरा का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या का दिन पूजा-पाठ, स्नान, दान और पितरों के स्मरण के लिए खास माना जाता है।
बन रहा है दुर्लभ संयोग
15 जून 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय नजरिए से बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो बहुत कम देखने को मिलता है। सोमवार के दिन सोमवती अमावस्या, मिथुन संक्रांति और ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का आखिरी दिन एक साथ पड़ रहा है। पंचांग के जानकारों का कहना है कि ऐसा संयोग कई पीढ़ियों में एक बार ही देखने को मिलता है।
मान्यता है कि अमावस्या पितरों को समर्पित होती है, सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए खास माना जाता है, अधिक मास भगवान विष्णु की आराधना का महीना होता है और संक्रांति सूर्य उपासना का पर्व मानी जाती है। ऐसे में एक ही दिन इन सभी का संगम होने से इसका महत्व और बढ़ गया है।
पुण्यकाल का समय
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 15 जून की सुबह 8:23 बजे तक सोमवती अमावस्या और संक्रांति का पुण्यकाल रहेगा। इस दौरान स्नान, दान, जप और पूजा-पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है।
मिथुन संक्रांति
15 जून को सूर्य वृष राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। यह घटना दोपहर करीब 12:49 बजे होगी। इसी कारण इस दिन मिथुन संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा।

















