अमित जोगी को एक बड़े आपराधिक मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने उनकी उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी है। इससे पहले हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद सर्वोच्च अदालत ने फिलहाल सजा पर रोक लगाने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय मेरिट के आधार पर बाद की सुनवाई में लिया जाएगा।
हाई कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
दरअसल, रामअवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा था. कोर्ट ने उन्हें राम अवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी ठहराया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई थी. यह फैसला हाई कोर्ट ने सुनाया था, जिसने निचली अदालत के पहले के फैसले को बदल दिया था.
2003 में हुआ था जग्गी हत्याकांड
बता दें कि 4 जून, 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिसमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे. वहीं 28 लोगों को सजा मिली थी, जबकि अमित जोगी को बरी कर दिया गया था. इसके बाद रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर जोगी के पक्ष में स्टे लगा था. बाद में SC ने केस को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया.
कौन थे रामावतार जग्गी?
रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे. जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था.



















