चार धाम यात्रा एक धार्मिक यात्रा है, जिसका खास महत्व होता है। इस यात्रा के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए निकलते हैं। केदरानाथ धाम की बात करें, तो आज यानी 22 अप्रैल को इसके कपाट खोल दिए गए हैं। केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है और चार धामों में से एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि केदारनाथ के दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और शिव लोक में स्थान मिलता है। केदारनाथ धाम के पास कई दिव्य कुंड भी मौजूद है, जहां लोग दर्शन के लिए जरूर जाते हैं। आज हम आपको ऐसे ही 2 दिव्य कुंड के बारे में बताने जा रहे हैं, जो केदारनाथ धाम के करीब है।
दिव्य कुंड के नाम
1. उदक कुंड
2. अमृत कुंड
उदक कुंड
केदारनाथ मंदिर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित यह पवित्र कुंड विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि इस कुंड में शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल प्रवाहित होकर आता है। यहां एक शिवलिंग भी स्थापित है, जहां श्रद्धालु अभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। भक्त इस कुंड का जल अपने साथ ले जाना शुभ मानते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के अंतिम समय में इस जल की कुछ बूंदें उसके मुख में डाली जाएं, तो उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त होती है। इसलिए केदारनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु इस पवित्र जल को साथ लेकर आना नहीं भूलते।
अमृत कुंड
केदारनाथ के निकट एक अन्य पवित्र स्थल अमृत कुंड के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इसे बेहद चमत्कारी माना जाता है। मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई रोग या शारीरिक कष्ट हो, तो इस कुंड के जल का छिड़काव करने से उसके कष्ट कम होते हैं और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
लापता हैं ये कुंड
हंस कुंड
रेतस कुंड
हवन कुंड
– हवन कुंड पहले केदारनाथ मंदिर के ठीक सामने स्थित था, लेकिन यहां आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद यह कुंड अब दिखाई नहीं देता।
– रेतस कुंड को लेकर मान्यता है कि जब कामदेव भस्म हो गए थे, तब देवी रति ने यहां विलाप करते हुए अपने आंसू बहाए थे। इस कुंड की खास बात यह है कि जब कोई श्रद्धालु यहां “ॐ नमः शिवाय” का उच्चारण करता है, तो पानी में बुलबुले उठने लगते हैं।
– हंस कुंड के बारे में कहा जाता है कि यहां ब्रह्मा जी ने हंस का रूप धारण किया था। इस पवित्र कुंड में पितरों का तर्पण और अस्थि विसर्जन किया जाता है। मान्यता है कि यहां किसी मृत व्यक्ति की जन्मकुंडली विसर्जित करने से उसकी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।



















