भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रखा जाने वाला हरतालिका तीज व्रत इस बार तिथि को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, इस बार हरतालिका तीज और चतुर्थी व्रत की तिथियां एक-दूसरे से जुड़ रही हैं, जिसके चलते कई लोग व्रत और पूजा की तारीख को लेकर असमंजस में हैं।
उदया तिथि के अनुसार रखा जाएगा व्रत
शास्त्रों में उदया तिथि को विशेष मान्यता दी गई है। ऐसे में हरतालिका तीज व्रत की तिथि को लेकर ज्यादा कंफ्यूजन रखने की जरूरत नहीं है। उदया तिथि 14 सितंबर को मिल रही है, इसलिए इसी आधार पर व्रत की तिथि निर्धारित की जाएगी। हरतालिका तीज के दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है और हरतालिका तीज की कथा सुनी या पढ़ी जाती है।
कथा और पूजा की तारीख को लेकर क्यों है भ्रम?
कुछ लोगों के बीच यह कंफ्यूजन है कि तीज की कथा और पूजा तृतीया तिथि में ही होनी चाहिए और उन्हें यह तिथि 13 सितंबर को मिल रही है। वहीं, उदया तिथि 14 सितंबर को पड़ रही है। इसी वजह से व्रत की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है।
कब से कब तक हरतालिका तीज की तिथि
तृतीया तिथि के आरंभ और समापन के समय लोगों में कंफ्यूजन की स्थिति है। इस साल तृतीया की शुरुआत 13 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 7:21 बजे होगी। जबकि समापन 14 सितंबर को सुबह 7:19 बजे होगा। उदयकाल में तृतीया 14 सितंबर को मिलेगी, लेकिन शाम में तृतीया 13 को मिल रही है, जिसमें प्रदोष काल में शिवजी की पूजा होती है। भृगु संहिता विशेषज्ञ पं.वेदमूर्ति शास्त्री बताते हैं कि शास्त्रीय परंपरा में व्रत और उद्यापन में उदयातिथि का मान होता है। यूपी-बिहार में अपनी-अपनी परंपरा को मान दिया जाता है तो लोग तीज को वैल्यू दे सकते हैं।
जहां हरितालिका व्रत और पूजन के लिए तृतीया तिथि का प्रत्यक्ष होना जरूरी है, वहां लोग 13 सितंबर को व्रत कर सकते। हालांकि 14 सितंबर को सुबह 7:19 बजे से पहले भी वे पूजन कर सकते हैं। यह भी क उदयकाल में मिलने वाली तिथि यदि अगले कुछ ही पलों अथवा घंटों बाद बदल जाए तो भी उसका मान पूरे दिन रहता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार 14 सितंबर को व्रत श्रेयष्कर है और शुभ माना जा रहा है। अगर आप तृतीया तिथि समाप्त होने से पहले सुबह ही पूजन कर लेते हैं तो व्रत का पारण चतुर्थी तिथि लगने के बाद उसी दिन सूर्यास्त के बाद कर सकते हैं।
इस दिन मनाते हैं शिवजी और पार्वती की मिट्टी की मूर्ति
मिट्टी या रजत-सुवर्णादि धातु से निर्मित शिव-पार्वती की मूर्ति का पंचोपचार, दशोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन करें। सुख-समृद्धि के दाता श्रीगणेश और गौरी की भी पूजा करें। नैवेद्य में विभिन्न प्रकार के सूखे मेवे, ऋतुफल, मिष्ठान्न अर्पित करें। हरितालिका तीज कथा का श्रवण करें। व्रत की रात्रि में जागरण करके देवी-देवताओं की महिमा में मंगल गान का विधान है। ज्योतिषाचार्य पं.विकास शास्त्री के अनुसार सर्वार्थसिद्धि, शोभन, गजकेसरी और पंचमहापुरुष योग बनने से तीज व्रत का महात्म्य बढ़ गया है। इन चारों ही योगों के फल अत्यंत शुभ और लाभप्रद हैं। गजकेसरी योग का महत्व विशेष रूप से माना गया है।

















