छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बढ़ेगी न्यायिक चुनौती
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पहले से लंबित मामलों का दबाव बना हुआ है। ऐसे में अगले दो महीनों के भीतर तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने से न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त भार पड़ने की आशंका है। यदि इस दौरान नए न्यायाधीशों की नियुक्ति नहीं होती है तो सितंबर 2026 तक हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या घटकर केवल 10 रह जाएगी, जबकि करीब 75 हजार मामले पहले से लंबित हैं।
हाल ही में 29 जून को न्यायमूर्ति रजनी दुबे अपने आठ वर्ष के कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त हुई हैं। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद मुख्य न्यायाधीश सहित हाईकोर्ट में कुल 13 न्यायाधीश कार्यरत हैं। अब अगले दो महीनों में तीन और वरिष्ठ न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
न्यायमूर्ति संजय श्याम अग्रवाल 21 अगस्त 2026 को, न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल 1 सितंबर 2026 को और मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा 5 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। इनके कार्यकाल समाप्त होने के बाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या घटकर केवल 10 रह जाएगी।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में स्वीकृत न्यायाधीशों के 22 पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 13 जज ही पदस्थ हैं। सितंबर में प्रस्तावित सेवानिवृत्तियों के बाद यदि रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं होती हैं तो हाईकोर्ट लगभग आधी स्वीकृत क्षमता के साथ कार्य करेगा।
75 हजार से अधिक मामले लंबित
उपलब्ध न्यायिक आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में करीब 74,800 से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है जो कई वर्षों से विचाराधीन हैं। न्यायाधीशों की संख्या घटने से नए मामलों की सुनवाई, अंतिम बहस और फैसलों की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
लंबित मामलों के निपटारे के लिए बनाई गई थी विशेष व्यवस्था
लंबे समय से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के उद्देश्य से मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने पहले विशेष पहल की थी। उन्होंने नियमित रोस्टर में बदलाव कर 10 वर्ष और 20 वर्ष से अधिक पुराने मामलों की सुनवाई के लिए विशेष पीठों और डिवीजन बेंचों का गठन किया था। इस व्यवस्था से पुराने मामलों के निस्तारण की गति में सुधार देखने को मिला।
हालांकि, विधि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए रिक्त पदों पर जल्द नियुक्तियां होना आवश्यक है। अन्यथा आने वाले समय में मामलों के निपटारे की चुनौती और बढ़ सकती है।


















