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चांदी के भाव में ₹2.23 लाख की ऐतिहासिक गिरावट, धनतेरस पर खरीदें या करें इंतजार?

Silver Rate Today: MCX पर चांदी का भाव सोमवार को ₹1,96,257 प्रति किलो पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह बढ़कर ₹1,97,186 प्रति किलो के ऊंचे स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, बाद में मुनाफावसूली के चलते भाव फिसलकर करीब ₹1,96,625 प्रति किलो पर आ गया। चांदी अपने रिकॉर्ड हाई ₹4,20,048 प्रति किलो से करीब ₹2,23,500 सस्ती हो चुकी है। जबकि, सर्राफा बाजारों में भी चांदी आज 195050 रुपये किलो बिक रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी 53% से ज्यादा टूट चुकी है।

दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 28 जनवरी 2026 को करीब 117 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन इसका भाव गिरकर 54 डॉलर प्रति औंस से थोड़ा ऊपर रह गया। ऐसे में सवाल यह है कि क्या चांदी अभी खरीदें या धनतेरस तक इंतजार करें?

धनतेरस पर चांदी खरीदें या निवेश का इंतजार करें?

धनतेरस पर चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के मन में सवाल है कि क्या यह निवेश का सही मौका है या कीमतों में अभी और गिरावट आ सकती है? बता दें धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन केवल त्योहार या कीमतों में आई गिरावट देखकर निवेश का फैसला करना सही नहीं है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट के बावजूद यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब भाव नीचे नहीं जाएंगे। निवेशकों को जल्दबाजी में बड़ी रकम लगाने के बजाय बाजार में स्थिरता के संकेतों का इंतजार करना चाहिए।

चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?

चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वजहें हैं। जैसे…

अमेरिका में ब्याज दरों की चिंता: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता से कीमती धातुओं पर दबाव पड़ा है।

मुनाफावसूली: रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बदलाव: अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड की चाल से सोने-चांदी की कीमतें प्रभावित हुई हैं।

औद्योगिक मांग की चिंता: चांदी का इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई औद्योगिक क्षेत्रों में होता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ने पर इसकी मांग प्रभावित हो सकती है।

भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई: वैश्विक तनाव और ऊर्जा कीमतों से जुड़ी महंगाई की चिंता भी बाजार की दिशा प्रभावित कर रही है।

क्या अभी चांदी खरीदना सही रहेगा?

केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया के मुताबिक, चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। मौजूदा गिरावट का मतलब यह नहीं है कि चांदी ने अपना सबसे निचला स्तर छू लिया है। ऐसे में निवेशकों को एक साथ बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। कीमतों में स्थिरता आने के संकेत मिलने के बाद धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि लंबी अवधि में सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिफिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स से चांदी की मांग को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, कमजोर आर्थिक गतिविधियों और तकनीकी बदलावों से इस मांग पर असर पड़ने का जोखिम भी है।

Silver ETF में निवेश करने वालों को क्या करना चाहिए?

केडिया के मुताबिक जो लोग फिजिकल चांदी खरीदने के बजाय सिल्वर ETF के जरिए निवेश करते हैं, उन्हें अपनी मौजूदा होल्डिंग और निवेश के लक्ष्य का आकलन करना चाहिए। निवेशकों को केवल इस आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए कि चांदी पहले कितनी महंगी थी और अब कितनी सस्ती हो गई है।

निवेशकों को इन 4 बातों का रखें ध्यान

1. पोर्टफोलियो में चांदी की हिस्सेदारी देखें: अगर चांदी में निवेश जरूरत से ज्यादा हो गया है, तो पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने पर विचार करें।

2. गिरावट में लगातार खरीदारी से बचें: सिर्फ औसत खरीद कीमत कम करने के लिए बार-बार चांदी खरीदना जोखिम बढ़ा सकता है।

3. ETF की कीमत और NAV की तुलना करें: सिल्वर ETF खरीदने से पहले उसकी बाजार कीमत और इंडिकेटिव नेट एसेट वैल्यू (iNAV) देखें। ट्रेडिंग वॉल्यूम और खरीद-बिक्री के भाव में अंतर पर भी ध्यान दें।

4. एक साथ पूरी रकम न लगाएं: अगर चांदी में निवेश करना आपके वित्तीय लक्ष्य के अनुरूप है, तो कई चरणों में निवेश करने पर विचार किया जा सकता है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जिन निवेशकों के पास पहले से सोने, चांदी या सिल्वर ETF में पर्याप्त निवेश है, उन्हें अपनी कुल हिस्सेदारी पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, नए निवेशक छोटी रकम से शुरुआत करके धीरे-धीरे निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। अगर अगले एक-दो साल में इस पैसे की जरूरत पड़ने वाली है, तो चांदी में निवेश जोखिम भरा हो सकता है। कीमतों को पुराने स्तर पर लौटने में लंबा समय लग सकता है।

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