रायपुर। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली युवा खिलाड़ी ज्ञानेश्वरी यादव का सोमवार को नवा रायपुर स्थित उप मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सम्मान किया गया। उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने ज्ञानेश्वरी के साथ उनके माता-पिता का भी सम्मान करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि से राज्य के युवाओं को नई प्रेरणा मिलेगी और छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार होगा।

सम्मान समारोह के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में अरुण साव ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने ज्ञानेश्वरी के पिता दीपक यादव और माता दुर्गा यादव के संघर्ष और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे परिवारों के कारण ही देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक दिलाने वाले खिलाड़ी मिलते हैं।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव जैसे आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मंच दिया जा रहा है। खेल अलंकरण और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मानित करने की प्रक्रिया भी दोबारा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के साथ बेहतर प्रशिक्षण की व्यवस्था पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है, ताकि आने वाले वर्षों में प्रदेश के अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत सकें।
पिता का सपना बना सबसे बड़ी प्रेरणा
प्रेस वार्ता में ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा करते हुए कहा कि उनके पिता का सपना ही उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में उनके पिता साइकिल से उन्हें जिम लेकर जाते थे और हमेशा कहते थे कि वे स्वयं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच सके, लेकिन चाहते हैं कि उनकी बेटी भारत का प्रतिनिधित्व करे और तिरंगा ऊंचा लहराए।

भावुक होते हुए ज्ञानेश्वरी ने कहा कि उनके पिता ने उनकी तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत की। प्रशिक्षण, खान-पान और अन्य जरूरतों का पूरा ध्यान रखा। उनकी हर उपलब्धि के पीछे पिता का त्याग, समर्पण और संघर्ष सबसे बड़ी ताकत रहा है।
चुनौतियों ने बनाया मजबूत
ज्ञानेश्वरी ने बताया कि विश्व चैंपियनशिप में पहली बार खेलने के दौरान वे काफी दबाव में थीं, लेकिन उसी अनुभव ने उन्हें बड़े मुकाबलों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना सिखाया। अब उनका लक्ष्य हर प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है। उन्होंने कहा कि जीवन की कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया और बड़े मंच पर आत्मविश्वास के साथ देश का प्रतिनिधित्व करने का हौसला दिया।
इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संयुक्त संचालक प्रभाकर पाण्डेय, उप संचालक रश्मि ठाकुर, भारोत्तोलन संघ के पदाधिकारी तथा विभिन्न खेलों के खिलाड़ी भी उपस्थित थे।


















