हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा को सबसे पवित्र यात्राओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों की संख्या में लोग केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र यात्रा से जिंदगी में पॉजिटिविटी आती है। आज बाबा केदार की चल विग्रह डोली केदारनाथ धाम पहुंच रही है। ऐसे में केदारपुरी वाले क्षेत्र में माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो चुका है। बता दें कि हर साल केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले बाबा की डोली को परंपरा के अनुसार धाम तक लाते हैं। रास्ते भर श्रद्धालु फूलों से उनका स्वागत करते हैं। इस बार केदारनाथ मंदिर को कुल 10 कुंतल फूलों से सजाया जा रहा है, जिस वजह से मंदिर की भव्यता देखते ही बन रही है। अब लोगों को मंदिर के पट खुलने का इंतजार है। आइए जानते हैं चल विग्रह डोली से लेकर केदारनाथ धाम के पट खुलने से जुड़ी सारी जानकारी के बारे में-
क्या है चल विग्रह डोली का मतलब?
चल विग्रह डोली का मतलब भगवान की उस मूर्ति से है जोकि खास तौर पर यात्रा के लिए ही रखा जाता है। जब सर्दियों के दिनों में केदारनाथ धाम के कपाट बंद हो जाते हैं तब बाबा केदार की इसी चल विग्रह डोलीको पालकी में रखकर ऊखीमठ तक ले आया जाता है। ठंडी भर यहीं पर बाबा की पूजा होती है। गर्मी शुरू होते ही डोली को फिर से पदयात्रा करते हुए केदारनाथ धाम लाया जाता है। डोली के पहुंचने का मतलब यही होता है कि अब बाबा अपने धाम में विराजमान होंगे और केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने का समय करीब आ गया है। बाबा के भक्त इस पल में शामिल होना सौभाग्य की बात मानते हैं।
कपाट खुलने से पहले यहां रहते हैं बाबा केदार
दरअसल ठंड के दिनों में केदारनाथ धाम पूरी तरह से ढक जाता है। ऐसे में वहां पर पूजा-अर्चना करना मुश्किल होता है। ऐसे में दीवाली के बाद के समय में ही कपाट बंद कर दिए जाते हैं। बाबा केदार की चल विग्रह डोली को ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिल लाया जाता है। ठंड के मौसम में यहीं पर बाबा की पूजा होती है। मौसम में जैसे ही बदलाव होता है तभी फिर से पदयात्रा करके डोली को केदारनाथ धाम वापस लाया जाता है। इसके बाद ही केदारनाथ धाम के कपाट खुलते हैं और फिर बाबा केदार के दर्शन शुरू हो जाते हैं।
12 साल बाद और भी भव्य दिखी केदारपुरी
2013 की आपदा को भूल पाना मुश्किल है। इस आपदा के बाद केदारपुरी दोबारा निर्माण हुआ। अब केदारपुरी पहले से और भी ज्यादा भव्य दिख रही है। यहां पर लोगों के लिए सुविधाएं भी बढ़ा दी गई हैं। मंदिर परिसर को बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया है। वहीं लिंचोली से आगे बढ़ते ही बर्फ से ढके विशाल पर्वतों का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है जो इस यात्रा को और खास बना देता है।
कब खुलेंगे केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट?
बाबा केदार के कपाट कल यानी 22 अप्रैल की सुबह 8 बजे विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री भी पूजा-अर्चना करने वाले हैं। वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। इसका इंतजार लोग साल भर करते हैं। वहीं इस चारधाम यात्रा में बाबा केदार के दर्शन को बहुत ही शुभ माना जाता है और कहा जाता है कि सच्चे मन से यहां पर कुछ भी मांगा जाए वो जरूर मनोकामना जरूर पूरी होती है।


















