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मानसून ने बदली तस्वीर, बिलासपुर में अब तक हो गई 70 फीसदी खेती

बिलासपुर। जिले में अच्छी बारिश के बाद खेती ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। 4,24,840 एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले अब तक करीब 70 प्रतिशत यानी 2,97,388 एकड़ में खेती पूरी हो चुकी है। एक सप्ताह पहले यह आंकड़ा लगभग 50 प्रतिशत के नीचे था। लगातार सक्रिय मानसून से लेई और रोपा पद्धति को गति मिली है, जिससे किसानों की चिंता कम हुई है। हालांकि सूखी बोनी केवल 33,988 एकड़ में ही हो सकी, जो सामान्य स्थिति की तुलना में काफी कम है।

जिले में सक्रिय मानसून ने खेती की रफ्तार को नई गति दे दी है। कुछ दिन पहले तक बारिश की कमी से चिंतित किसान अब राहत महसूस कर रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार जिले को इस वर्ष 4,24,840 एकड़ में खरीफ फसलों की बुआई का लक्ष्य मिला है। इसके मुकाबले अब तक लगभग 70 प्रतिशत यानी 2,97,388 एकड़ क्षेत्र में खेती पूरी हो चुकी है। लगातार और अच्छी बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बनी है, जिससे लेई और रोपा पद्धति से धान की बुआई तेजी से हो रही है। बारिश के साथ जलाशयों में भी पर्याप्त पानी पहुंचने से सिंचाई की चिंता कम हुई है। खेती में आई इस तेजी से ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है और किसान शेष रकबे में भी जल्द बुआई पूरी करने में जुट गए हैं।

हालांकि इस बार मानसून की देरी का सबसे अधिक असर सूखी बोनी पर पड़ा। सामान्य वर्षों में जहां इस समय तक बड़ी मात्रा में सूखी बोनी पूरी हो जाती है, वहीं इस वर्ष केवल 33,988 एकड़ क्षेत्र में ही यह कार्य हो पाया। मौसम की अनिश्चितता के कारण अधिकांश किसानों ने सूखी बोनी छोड़कर लेई और रोपा पद्धति को अपनाया।

15 अगस्त तक रोपा का मौका, किसानों को राहत

धान की रोपा पद्धति के लिए 15 अगस्त तक का समय उपयोगी माना जाता है। सामान्यतः लेई पद्धति से बुआई 31 जुलाई तक सबसे उपयुक्त रहती है, लेकिन इस बार अच्छी बारिश और जलाशयों में बढ़ते जलभराव के कारण किसानों को अतिरिक्त राहत मिली है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार शेष क्षेत्र में समय रहते रोपा पूरा होने पर उत्पादन पर अधिक असर नहीं पड़ेगा और किसान खरीफ सीजन का पूरा लाभ उठा सकेंगे।

सूखी बोनी लक्ष्य से बहुत पीछे

मानसून की देरी ने जिले में सूखी बोनी को सबसे अधिक प्रभावित किया है। 4,24,840 एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 33,988 एकड़ में ही सुखी बोनी हो सकी है। सामान्य स्थिति में इस समय तक करीब 3,39,872 एकड़ में यह कार्य पूरा हो जाना चाहिए था। लगातार बारिश के कारण किसान अब सूखी बोनी छोड़कर लेई और रोपा पद्धति से खेती करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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