रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को लेकर उच्च शिक्षा संचालनालय ने ‘अतिथि व्याख्याता (संशोधित-2026) नीति’ जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब अतिथि व्याख्याताओं को प्रति कार्यदिवस 2,000 रुपये का मानदेय मिलेगा, जबकि अधिकतम मासिक भुगतान 50 हजार रुपये तक होगा। इसके साथ ही पीएचडी शोध कार्य और मातृत्व अवकाश जैसी नई सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।
नई नीति के अनुसार, यदि किसी संस्थान में एक ही विषय के प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी होता है, तो अभ्यर्थी को केवल एक आवेदन करना होगा। नियुक्ति विषयवार तैयार की गई मेरिट सूची के आधार पर की जाएगी। वहीं, अनुभव प्रमाण पत्र तभी जारी होगा, जब अतिथि व्याख्याता एक शिक्षण सत्र में कम से कम पांच महीने तक सेवाएं देगा।
नीति के तहत अतिथि शिक्षकों को नियमित कर्मचारियों की तरह प्रतिदिन सात घंटे कार्य करना होगा। उन्हें प्रत्येक शिक्षण सत्र में 11 सवेतन अवकाश दिए जाएंगे। इसके अलावा पीएचडी कोर्स वर्क और शोध कार्य के लिए तथा महिला अतिथि शिक्षकों को 180 दिनों का अवैतनिक मातृत्व अवकाश भी मिलेगा। अब अतिथि व्याख्याताओं से केवल अध्यापन ही नहीं, बल्कि प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा कार्य, नैक मूल्यांकन, छात्रसंघ चुनाव, खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी सहयोग लिया जाएगा।
नई मानदेय व्यवस्था के तहत अतिथि ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी को 1,600 रुपये प्रतिदिन (अधिकतम 40 हजार रुपये प्रतिमाह), अतिथि शिक्षण सहायक को 1,400 रुपये प्रतिदिन (अधिकतम 35 हजार रुपये) तथा अतिथि ग्रंथालय और क्रीड़ा सहायक को 1,200 रुपये प्रतिदिन (अधिकतम 30 हजार रुपये) मानदेय मिलेगा। योग्यता के लिए शिक्षण, ग्रंथालय और क्रीड़ा सहायकों के पदों पर स्नातकोत्तर में अनारक्षित वर्ग के लिए 55 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के लिए 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य किए गए हैं। नई नीति का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षण व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।


















