राजधानी में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने मंत्रालय में नौकरी लगाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से करीब 23 लाख रुपये ऐंठ लिए। मामले का खुलासा तब हुआ, जब पीड़ित को दिया गया जॉइनिंग लेटर फर्जी निकला। पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को मंत्रालय और वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़ा हुआ बताया था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी पहुंच ऊंचे स्तर तक है और कुछ ही समय में सरकारी विभाग में नियुक्ति करा दी जाएगी। आरोपियों ने पहले प्रोसेसिंग फीस और दस्तावेजों के नाम पर पैसे लिए, फिर नियुक्ति पक्की कराने का हवाला देकर लगातार रकम मांगते रहे।
काफी रकम देने के बाद पीड़ित को एक जॉइनिंग लेटर सौंपा गया। हालांकि, दस्तावेज देखने पर उसे शक हुआ। जब संबंधित मंत्रालय में इसकी जांच कराई गई तो पता चला कि नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी है और विभाग की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का लालच देकर निशाना बनाते थे।
पहचान का फायदा उठाकर दिया नौकरी का झांसा
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, रायपुरा निवासी आकाश साहू वाहन खरीदी-बिक्री का काम करते हैं. करीब दो साल पहले उनकी पहचान जितेंद्र बघेल के जरिए विश्वनाथ गुप्ता उर्फ विष्णु गुप्ता और उसकी पत्नी चंदा गुप्ता से हुई थी. दोनों खुद को मंत्रालय और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते थे. आरोपियों ने दावा किया कि नवा रायपुर मंत्रालय और जल संसाधन विभाग में रिक्त पद हैं, जहां वे आसानी से नौकरी लगवा सकते हैं.
पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर लिए लाखों रुपये
आकाश साहू ने अपनी पत्नी रेशमी साहू और रिश्तेदार शेषनारायण साहू व रविशंकर साहू के लिए आरोपियों से बात की. शिकायत के मुताबिक, अगस्त से सितंबर 2024 के बीच अलग-अलग किश्तों में फोन-पे और नकद के जरिए कुल 23 लाख रुपये आरोपियों को दिए गए. बदले में दंपती ने दो महीने के भीतर नियुक्ति कराने का भरोसा दिया था.
फर्जी दस्तावेज देखकर खुली पोल
कुछ समय बाद आरोपियों ने मोबाइल पर नियुक्ति पत्र भेजा और जनवरी 2025 में व्हाट्सऐप के जरिए इम्प्लॉय आईडी भी उपलब्ध कराई. जब पीड़ित अपने परिजनों के साथ मंत्रालय पहुंचा तो वहां अधिकारियों ने साफ कर दिया कि ऐसा कोई नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ है और सभी दस्तावेज नकली हैं.
‘रेड’ का बहाना बनाकर करते रहे गुमराह
धोखाधड़ी का एहसास होने पर आकाश साहू ने आरोपियों से संपर्क किया. इस दौरान विश्वनाथ गुप्ता ने मंत्रालय में “रेड” चलने की बात कहकर मामला टाल दिया और कुछ दिन बाद जॉइनिंग कराने का आश्वासन देता रहा. करीब दो महीने तक इंतजार करने के बाद जब आरोपी का मोबाइल बंद आने लगा, तब पीड़ित उसके गृह ग्राम पत्थलगांव पहुंचा. वहां आरोपी नहीं मिला, जबकि उसकी पत्नी ने जल्द पैसे लौटाने की बात कही. इसके बाद दोनों पूरी तरह संपर्क से बाहर हो गए.
पुलिस ने दर्ज किया मामला
पीड़ित की शिकायत पर डीडी नगर थाना पुलिस ने विश्वनाथ गुप्ता और चंदा गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.



















