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UPI के जरिये लिंक भेजकर भुगतान मांगने पर लगेगी रोक

UPI के जरिए होने वाली साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए नियमों में बदलाव होगा। इसके तहत यूपीआई पर ‘पुल भुगतान’ की सुविधा को बंद करने की तैयारी है। इसमें दुकानदार, ई-कॉमर्स कंपनियां या अन्य व्यक्ति लिंक भेजकर बिल या रकम भुगतान का अनुरोध भेजता है। रकम पहले से भरी होती है और सिर्फ पिन डालकर मंजूरी देनी होती है।

बताया जा रहा है कि इस सुविधा को 31 अक्टूबर से बंद कर दिया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम इस पर विचार कर रहा है और बैंकों से इस मुद्दे पर बातचीत की जा रही है। जानकारों का कहना है कि अधिकांश साइबर ठगी ‘पुल भुगतान’ के जरिए हो रही है।

इस सुविधा में तकनीकी दिक्कत नहीं है लेकिन ठग इसका गलत फायदा उठाने लगे हैं। कई लोग धोखे में यह समझते हैं कि उनके खाते में पैसे आ रहे हैं, जबकि वास्तव में उनके खाते से पैसे कट जाते हैं। निगम ने 2019 में ही ‘पुल’ भुगतान की अधिकतम सीमा 2,000 रुपये प्रति लेन-देन तय कर दी थी, इसके बावजूद धोखाधड़ी पर रोक नहीं लग पाई। आंकड़ों के अनुसार, बीते जुलाई महीने में यूपीआई ने 19.4 अरब लेनदेन दर्ज किए, जिनमें सात अरब पी2पी लेनदेन थे।

लोगों पर क्या असर

यदि ‘पुल भुगतान’ सुविधा बंद होती है तो इसका असर ऑटो-डेबिट आधारित सब्सक्रिप्शन और बिल भुगतान पर असर पड़ेगा। अभी कई लोग बिजली, मोबाइल रिचार्ज, गैस और अन्य बिल के लिए ऑटो-डेबिट भुगतान तय कर देते हैं। इस सुविधा के बंद होने के बाद ग्राहक को हर महीने खुद ही भुगतान करना होगा।

चकमा देने का तरीका

साइबर ठग UPI ‘पुल भुगतान’ प्रक्रिया के जरिए उन लोगों को निशाना बनाते हैं, जिन्हें इसके बारे में कम जानकारी होती है। वे ऑनलाइन सेल या रिफंड जैसी किसी चीज के लिए रकम भेजने का झांसा देते हैं। लेकिन रकम भेजने के बजाए रकम मंगाने का अनुरोध भेजते हैं। पीड़ित द्वारा यूपीआई पिन डालते ही उसके खाते से रकम कट जाती है।

ऐसे होता है भुगतान

यूपीआई में फिलहाल दो तरह से भुगतान होते हैं। पहला है ‘पुश’ तरीका। इनमें भुगतान करने वाला व्यक्ति खुद क्यूआर कोड स्कैन करता है या राशि भरकर लेनदेन पूरा करता है। दूसरा है ‘पुल’ तरीका, जिसमें पैसे लेने वाला व्यक्ति सामने वाले को रकम भेजने के लिए अनुरोध भेजता है। फिर दूसरा शख्स अपना यूपीआई पिन डालकर भुगतान मंजूर करता है।

27 हजार शिकायतें

वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में आरबीआई के लोकपाल को 27 हजार से अधिक शिकायतें मिली हैं। इसमें अप्रैल-जून 2024 में 14,401 और जुलाई-सितंबर 2024 के दौरान 12,744 शिकायतें मिली हैं। पहली छमाही में कुल शिकायतों में से 70% शिकायतें लोन और डिजिटल माध्यम से किए गए भुगतान से जुड़ी थीं।

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