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Shiv Sena MNS Joint Rally: क्या बची हुई शिवसेना भी होगी हाईजैक!

Shiv Sena MNS Joint Rally:  मुंबई. महाराष्ट्र की राजनीति (Politics) में शनिवार का दिन ऐतिहासिक (Historic) रहा, जब करीब दो दशक बाद शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे एक ही मंच (Platform) पर नजर आए। मराठी भाषा और अस्मिता (Identity) के मुद्दे पर आयोजित इस रैली (Rally) में दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा (BJP) की भाषा नीति (Language Policy) की तीखी आलोचना की।

इस मंच साझा करने से महाराष्ट्र की सियासत में हलचल (Stir) तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों (Analysts) ने इसे राज्य में एक नए राजनीतिक युग (Era) की शुरुआत बताया है। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि इस गठबंधन (Alliance) से किसे ज्यादा फायदा होगा? क्या शिवसेना फिर से विभाजन (Split) का शिकार होगी? उद्धव और एकनाथ शिंदे के अलग होने के बाद क्या शिवसेना फिर हाईजैक (Hijack) होगी?

कांग्रेस की अनुपस्थिति, MVA में दरार?

रैली में ठाकरे बंधुओं की एकजुटता के बीच कांग्रेस (Congress) की गैरमौजूदगी ने ध्यान खींचा। विश्लेषक संजीव उन्हाले ने कहा, “कांग्रेस ने खुद को पीछे खींच लिया, यह महा विकास अघाड़ी (MVA) में टूट (Crack) का संकेत हो सकता है।” राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार गुट की ओर से भी कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे गठबंधन की स्थिति अस्पष्ट है।

राज ठाकरे की स्वाभिमानी राजनीति

विश्लेषक संजय वरकड़ ने कहा, “राज ठाकरे उद्धव जैसे समझौते (Compromise) नहीं करेंगे। उनकी राजनीति मराठी अस्मिता पर केंद्रित है, जबकि उद्धव की सत्ता (Power) की ओर झुकाव दिखता है।” रैली में राज ने कहा, “मराठी अस्मिता हमारी प्राथमिकता (Priority) है, जो किसी भी सियासत से बड़ा है।”

मनसे को मराठवाड़ा-विदर्भ में बढ़त की उम्मीद 

अब तक मुंबई और ठाणे तक सीमित मनसे को इस साझेदारी से मराठवाड़ा और विदर्भ में विस्तार (Expansion) मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि ‘जय महाराष्ट्र’ बनाम ‘जय गुजरात’ की लड़ाई में शिंदे गुट को नुकसान (Loss) हो सकता है।

यह एकता युवा नेतृत्व (Youth Leadership) को मजबूत कर सकती है। आदित्य ठाकरे ने मराठवाड़ा में जमीनी स्तर पर काम किया है, जबकि अमित ठाकरे अपनी पहचान बना रहे हैं। दोनों ठाकरे परिवारों की एकजुटता युवाओं को नया आधार दे सकती है।

संजीव उन्हाले ने कहा कि 2022 में शिवसेना टूटने के बाद उद्धव अपनी छवि (Image) को फिर से गढ़ रहे हैं। राज के भाषण भीड़ खींचते हैं, लेकिन वोट (Votes) में तब्दील नहीं होते। यह एकता ठाकरे परिवार को भविष्य की रणनीति (Strategy) बनाने का मौका दे सकती है।

रैली से यह साफ है कि महाराष्ट्र की सियासत में नई करवट शुरू हो चुकी है। भाजपा के हिंदुत्व और विकास (Development) के एजेंडे के खिलाफ ठाकरे बंधु मराठी अस्मिता को केंद्र में ला रहे हैं। कांग्रेस की अनुपस्थिति ने MVA की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और नए समीकरण (Equations) बनने की आहट तेज हो गई है।

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