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बुधादित्य योग में शक्ति की आराधना का पर्व क्वांर नवरात्र कल से

रायपुर. शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र 22 सितंबर सोमवार से उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र तथा श्रीवत्स एवं बुधादित्य योग में प्रारंभ होगा। इस वर्ष नवरात्र दस दिवसीय है। चतुर्थी तिथि दो दिन 25 एवं 26 सितंबर को रहेगा। दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर को एवं विजया दशमी 2 अक्टूबर को है। भगवाताचार्य पं. जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि शरद और वसंत ऋतुएं यमदृष्ट अर्थात ऋतुओं का संधिकाल होता है। इस योग में विभिन्न रोग होने की आशंका रहती ह, जिससे मौत भी हो सकती है। इसलिए ही भगवती की आराधना किए जाने हेतु व्यवस्था की गई है। दो नवरात्र शरद एवं वसंत आम लोगों के लिए होता है। इसमें अश्विन मास की नवरात्र शारदीय नवरात्र कहलाती है। इस नवरात्र में शक्ति पीठों, देवी मंदिरों के अतिरिक्त मां दुर्गा प्रतिमा की स्थापना तथा ज्वांरा भी स्थापित कर शक्ति की आराधना से भक्ति में तल्लीन रहते हैं। नवरात्रि में नौ दिनों तक भगवती नवदुर्गा के नौ रूपों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायिनी, कालरात्रि, गौरी, सिद्धिदात्री के रूप में पूजा की जाती है। अंचल के प्रसिद्ध देवी मंदिर मां महामाया मंदिर मां रतनपुर में इस साल 30 हजार 500 ज्योति कलश प्रज्वलित होंगे जिसमें तेल के 24,500 और घी 3500 है, आजीवन ज्योति कलश 1800 हैं जिसमें 1275 तेल और 525 घी के होंगे। मां महामाया मंदिर ट्रस्ट एवं पुजारी पं. संतोष शर्मा ने बताया कि महामाया मंदिर रतनपुर में घट स्थापना मुहुर्त प्रातः 7 बजे से 10 बजे तक है, इसी मुहुर्त में यहां घट स्थापना के बाद सभी ज्योति कलश प्रज्वलित होंगे।

कलश यात्रा के साथ अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना

मां दुर्गा के नवरुपों की पूजा एवं भक्ति का पर्व शारदीय नवरात्र 22 सितंबर से प्रारंभ होगा। श्री आदि शक्ति मां मावली देवी धाम बिरकोना में शारदीय नवरात्र पर्व की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है। पहले दिन भव्य कलश यात्रा के साथ अभिजित मुहूर्त में घट स्थापना की जाएगी, यहां 301 से अधिक मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन, पूजन किया जाएगा, नवमी के दिन कन्या भोज, ब्राह्मण भोजन, महा आरती, भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

इस वर्ष हाथी पर सवार होकर आएंगी देवी

ज्योतिषाचार्य पं. पंकज भूषण मिश्रा के अनुसार नवरात्र में शक्ति की उपासना के साथ ही व्रत की भी महिमा है। सामर्थ्य हो तो नौ दिनों तक व्रत करना चाहिए अन्यथा आप प्रतिपदा से सप्तमी तक, सप्तरात्र या पंचमी को एक भुक्त, षष्ठी को नक्त व्रत, सप्तमी को अयाचित, अष्टमी को उपवास नवमी को पारणा से पंचरात्र या सप्तमी, अष्टमी, नवमी के एक भुक्त से त्रिरात्र या आरंभ और समाप्ति के दो व्रतों से युग्म रात्र या आरंभया समाप्ति के एक व्रत से एक रात्र इनमें से किसी भी प्रकार के व्रत से अभीष्ट सिद्धि की प्राप्ति होती है। इस वर्ष देवी हाथी पर सवार होकर आयेंगी, जो अत्यन्त शुभ है देश में समृध्दि आएगी, वारों के अनुसार देवी की सवारी निर्धारित होती है।

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