नई दिल्ली। राष्ट्रीय Pension प्रणाली (एनपीएस) में निवेश करने वालों के लिए पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने बड़ा बदलाव किया है। पीएफआरडीए ने मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क को मानकीकृत करते हुए इक्विटी निवेश के आधार पर एनपीएस की पांच स्पष्ट जोखिम श्रेणियां तय की हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग पेंशन योजनाओं की तुलना आसान बनाना और निवेशकों को जोखिम के अनुरूप सही योजना चुनने में मदद करना है।
पीएफआरडीए की ओर से 28 अगस्त को जारी नए परिपत्र के अनुसार अब पेंशन फंड अपनी योजनाओं में इक्विटी निवेश का मनमाना दायरा नहीं रख सकेंगे। प्रत्येक योजना को निर्धारित पांच श्रेणियों में से किसी एक के दायरे में रहना होगा।
एनपीएस की पांच नई श्रेणियां
- श्रेणी ए: 80 से 100 प्रतिशत इक्विटी — आक्रामक वृद्धि, बहुत अधिक जोखिम
- श्रेणी बी: 60 से 80 प्रतिशत इक्विटी — उच्च वृद्धि, अधिक जोखिम
- श्रेणी सी: 35 से 60 प्रतिशत इक्विटी — संतुलित वृद्धि, मध्यम जोखिम
- श्रेणी डी: 10 से 35 प्रतिशत इक्विटी — रूढ़िवादी निवेश, कम जोखिम
- श्रेणी ई: 0 से 10 प्रतिशत इक्विटी — ऋण आधारित, अपेक्षाकृत सुरक्षित आय
एक श्रेणी में अधिकतम दो योजनाएं
नए नियमों के तहत किसी भी पेंशन फंड को प्रत्येक श्रेणी में अधिकतम दो योजनाएं संचालित करने की अनुमति होगी। यदि किसी एक श्रेणी में दो से अधिक योजनाएं मौजूद हैं, तो उनका 45 दिनों के भीतर विलय करना होगा। हालांकि, यह नया वर्गीकरण सरकारी क्षेत्र के एनपीएस खातों पर लागू नहीं होगा।
30 दिनों में बदलना होगा योजनाओं का नाम
पेंशन फंडों को योजनाओं के नाम निर्धारित प्रारूप के अनुरूप बदलने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। नए नाम में पेंशन फंड का संक्षिप्त नाम, एनपीएस, संबंधित श्रेणी कोड और योजना का नाम शामिल होगा।
योजना बंद होने पर निवेशकों को मिलेगा विकल्प
यदि किसी योजना को बंद किया जाता है तो संबंधित निवेशकों को अपना पैसा दूसरी योजना में स्थानांतरित करने का विकल्प दिया जाएगा। यदि निवेशक कोई विकल्प नहीं चुनता है, तो उसका निवेश डिफॉल्ट रूप से उसी पेंशन फंड की लाइफ साइकिल 50 मॉडरेट योजना में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
मौजूदा निवेशकों को क्या करना होगा?
योजना के नाम में बदलाव होने मात्र से मौजूदा एनपीएस निवेशकों को कोई नया फैसला लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, यदि योजनाओं का विलय होता है तो निवेशकों को संबंधित बदलाव पर ध्यान देना होगा।
फंड चुनने से पहले मिल सकेगी पूरी जानकारी
नए नियमों के तहत पेंशन पोर्टल पर योजना चुनने से पहले निवेशकों को निर्धारित क्रम में जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। निवेशक अलग-अलग फंडों के पिछले प्रदर्शन, बेंचमार्क रिटर्न, प्रबंधनाधीन संपत्ति, खर्च और जोखिम मीटर की तुलना कर सकेंगे। इससे जोखिम क्षमता और निवेश लक्ष्य के अनुसार एनपीएस योजना का चुनाव करना पहले की तुलना में आसान होने की उम्मीद है।


















