सनातन धर्म में कई ऐसी कहानियां हैं जिनके आधार पर वर्षों से व्रत और तमाम तरह की पूजा विधि चली आ रही हैं। कुछ किस्से तो ऐसे हैं जिन्हें सुनते हुए ही कोई भी मंत्रमुग्ध हो जाए। हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी को काफी पवित्र और अहम माना गया है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीविष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। वेद पुराणों से लेकर हिंदू धर्म ग्रंथों में विष्णुजी को ही पूरी ब्रह्मांड का पालनहार और संरक्षक माना गया है। ऐसे में सोचने वाली बात है कि अगर वो योगनिद्रा में चले जाते हैं तो इस ब्रह्मांड की रक्षा कौन करता है? चलिए जानते हैं कि आखिर शास्त्रों में क्या लिखा हुआ?
कौन करता है ब्रह्मांण की रक्षा?
बता दें कि विष्णुजी कुल चार महीने के लिए योगनिद्रा में जाते हैं। इस टाइमलाइन को चातुर्मास कहा गया है। बता दें कि इस अवधि में कोई भी मांगलिक काम नहीं किया जाता है। अब सवाल ये है कि आखिर विष्णुजी के योगनिद्रा में जाते ही इस सृष्टि की देखभाल कौन करता है? बता दें कि विष्णुजी के योगनिद्रा में जाते ही 4 दिन बाद ही गुरुपूर्णिमा आती है। तो ऐसे में 4 दिन के लिए सृष्टि की रक्षा गुरुदेव करते हैं। इसके बाद सावन का महीना लग जाता है। इस तरह से पूरे एक महीने तक ब्रह्मांण की रक्षा भगवान शिव करते हैं। सावन खत्म होते ही भाद्रपद के 19 दिन होते हैं जो श्रीकृष्ण संभाल लेते हैं।
देव उठनी एकादशी में जागते हैं विष्णुजी
इसके तुरंत बाद ही गणेश चतुर्थी आती है तो पूरे 10 दिन सृष्टि की रक्षा गणपति बप्पा कर लेते हैं। इसके बाद पितृ देवों ने 16 दिन के लिए पितृपक्ष में सृष्टि की रक्षा की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली। फिर आती है नवरात्रि और इस दौरान 10 दिनों के लिए देवी मां पूरे ब्रह्मांण को संभाल लेती हैं। इसके बाद दिवाली आते ही पूरे 10 दिन लक्ष्मीजी ये जिम्मेदारी उठा लेती हैं। आखिरी के 10 दिन की जिम्मेदारी कुबेरजी अपने कंधे पर लेते हैं। इसके बाद ही देव उठनी एकादशी आती है, जब विष्णुजी उठ जाते हैं और समस्त सृष्टि का जिम्मा फिर से अपने पास ले लेते हैं।



















