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मंगल ग्रह जैसी मिट्टी में सब्जियां उगाने की कोशिश सफल

वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह जैसी मिट्टी में सब्जियां उगाने में सफलता हासिल कर ली है. इस मिट्टी में कोई कार्बनिक पदार्थ नहीं हैं. इसे नासा के शोधार्थियों ने तैयार किया है. इसमें कुछ पोषक तत्व मिलाए गए हैं. उन्होंने मंगल ग्रह के ग्रीनहाउस का वातावरण तैयार करने के लिए गैस, तापमान और नमी को भी नियंत्रित किया है. जर्नल प्लोस वन में प्रकाशित अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है.एक साथ उगाए गाजर, मटर, टमाटर

वैज्ञानिकों ने चेरी टमाटर, मटर और गाजर को एक साथ गमले में उगाया हैष समान मिट्टी में इस तरीके से उगाने पर अकेले उगाने की तुलना में टमाटरों की दोगुनी पैदावार हासिल हुई है. फल ज्यादा भी हैं और बड़े भी. टमाटर के पौधे में फूल भी जल्दी आए और वो जल्दी पक कर तैयार हो गए. हर पौधे में ज्यादा टमाटर निकले और पौधे का तना भी ज्यादा मोटा तैयार हुआ. हालांकि, इंटक्रॉपिंग से मटर और गाजर की पैदावार में बढ़त नहीं दिखी है.

इसलिए है ऐसे परीक्षणों की जरूरत

नासा ऐसी क्षमताएं विकसित करने पर काम कर रही है जिनकी जरूरत 2030 के दशक में मंगल ग्रह पर लोगों को भेजने के लिए होगी. मंगल ग्रह पर भविष्य में जब इंसान बस्ती बनाएगा तो बहुत सी चीजें धरती से ही लेकर जानी पड़ेंगी. लेकिन सबसे पहले वहां जिस चीज की व्यवस्था करनी पड़ेगी वह है भोजन. अगर भोजन वहां रॉकेट से भेजना पड़ा तो वह बहुत महंगा और जोखिम से भरा होगा. इसी बात को ध्यान में रख कर वैज्ञानिक अंतरिक्ष में खेती की संभावनाएं तलाश रहे हैं.

माया सभ्यता के किसानों की तकनीक अपनाई

नीदरलैंड्स के वागेनिंगन यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च के शोधार्थियों ने यह तरीका खोजा है. इससे मंगल ग्रह जैसी मिट्टी में फसलों की उपज बढ़ाने में कामयाबी मिली है. इस तरीके में कई फसलें एक साथ उगाई जाती हैं. प्राचीन माया सभ्यता के किसान इसमें काफी कुशल थे. इसे इंटरक्रॉपिंग कहा जाता है. इंटरक्रॉपिंग में ऐसे पौधों को उगाने की कोशिश होती है जो एक दूसरे को उगने में मदद दे सकें. इससे पानी और पोषक तत्वों जैसे संसाधनों का उचित इस्तेमाल हो पता है.

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