नई दिल्ली। बहुचर्चित शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके पुत्र चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. गिरफ्तारी से बचने के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी है.
बता दें कि ईडी ने 18 जुलाई की सुबह भिलाई स्थित बघेल निवास पर छापा मारकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेट चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन के दिन ही गिरफ्तार किया था. मामले में न्यायिक रिमांड खत्म होने पर आज कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें फिर से 14 दिन की न्यायायिक रिमांड में जेल भेज दिया गया. अब चैतन्य बघेल को 18 अगस्त को कोर्ट में पेश किया जाएगा.
ईडी ने किया बड़ा खुलासा
21 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) रायपुर जोनल कार्यालय की ओर से प्रेस नोट में दी गई जानकारी के अनुसार, ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है.
शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई.



















