15 Women of Indian Constituent Assembly: रायपुर. भारत का संविधान केवल कानूनों का दस्तावेज नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की सामूहिक चेतना का प्रतीक है. इसे गढ़ने वाली संविधान सभा में कुल 299 सदस्य थे, जिनमें से 15 महिलाएं भी शामिल थीं. उस दौर में जब महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी सीमित थी, इन महिलाओं का संविधान सभा तक पहुंचना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि थी. इन 15 महिलाओं ने समानता, मौलिक अधिकारों, सामाजिक न्याय, शिक्षा और महिला अधिकारों जैसे मुद्दों पर प्रभावी हस्तक्षेप किया. उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि संविधान केवल पुरुषों की दृष्टि से नहीं, बल्कि पूरे समाज की आवाज बने.
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हंसा मेहता, राजकुमारी अमृत कौर, सरोजिनी नायडू, दुर्गाबाई देशमुख, सुचेता कृपलानी, अम्मू स्वामीनाथन, दक्षायणी वेलायुधन, कमला चौधरी, बेगम कुदसिया एजाज रसूल, लीला रॉय, पूर्णिमा बनर्जी, मालती चौधरी, रेणुका रे, विजयलक्ष्मी पंडित और एनी मैसकेरीन. अम्मू स्वामीनाथन संवैधानिक प्रावधानों में लैंगिक समानता की मुखर आवाज बनीं. बेगम कुदसिया ऐजाज रसूल धर्मनिरपेक्षता की कट्टर समर्थक थी. दक्षायणी वेलायुधन ने अस्पृश्यता काविरोध किया. दुर्गाबाई ने सामाजिक कल्याणकारी नीतियों के निर्माण और महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में योगदान दिया.
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हंसा जीवराज ने मौलिक अधिकारों का प्रारूप तैयार करने में भूमिका निभाई. राजकुमारी अमृत कौर ने आधुनिक स्वास्थ्य सेवा की नींव रखी. सरोजिनी नायडू स्वराज की हिमायती थीं. सुचेता कृपलानी यूनिवर्सल सिविल कोड की समर्थक थी. वहीं विजयलक्ष्मी पंडित ने वैश्विक शासन में भारत की भूमिका का पुरजोर समर्थन किया.



















