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छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बड़ी घोषणा; धान छोड़ अन्य फसल बोने पर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को फसल विविधीकरण (क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन) की ओर प्रेरित करने के लिए एक नई योजना की घोषणा की है। इसके तहत धान की खेती छोड़कर अन्य फसलें बोने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकारी योजना का उद्देश्य राज्य में पानी की खपत को कम करना, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार लाना और किसानों को अधिक लाभकारी फसलों की ओर प्रोत्साहित करना बताया गया है। सरकार का मानना है कि धान की अधिक खेती से भू-जल स्तर पर दबाव बढ़ता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

राज्य मंत्रिपरिषद ने खरीफ 2026 से कृषक उन्नति योजना के नए स्वरूप को मंजूरी दे दी है। इसके तहत धान की जगह अन्य खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे फैसले से प्रदेश में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसान केवल धान पर निर्भर रहने के बजाय दूसरी लाभकारी फसलों की ओर भी आकर्षित होंगे। यह फैसला खास तौर पर उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां लंबे समय से धान की एकल खेती का चलन रहा है।

इन फसलों की खेती पर मिलेगा लाभ

दरअसल, नई व्यवस्था के मुताबिक दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों की खेती करने वाले किसानों को योजना का लाभ मिलेगा। वहीं सरकार का उद्देश्य प्रदेश में इन वैकल्पिक फसलों का रकबा बढ़ाना है ताकि कृषि क्षेत्र अधिक संतुलित और टिकाऊ बन सके।

विशेषज्ञों की राय 

विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन और तिलहन जैसी फसलें न केवल किसानों को बेहतर बाजार मूल्य दिला सकती हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मददगार होती हैं। वहीं मोटे अनाजों को बढ़ावा देने से पोषण सुरक्षा और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

सरकार का मानना है कि कृषक उन्नति योजना (CG Krishak Unnati Yojana) का नया स्वरूप किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके साथ ही प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान धान उत्पादन पर निर्भर हैं। ऐसे में बाजार, मौसम और उत्पादन संबंधी जोखिमों का असर सीधे उनकी आय पर पड़ता है।

जिससे फसल विविधीकरण के माध्यम से किसानों को आय के नए विकल्प मिलेंगे और कृषि क्षेत्र में जोखिम भी कम होगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान दलहन, तिलहन और मक्का जैसी फसलों की ओर रुख करते हैं तो उन्हें बेहतर लाभ मिलने की संभावना है, साथ ही प्रदेश में कृषि उत्पादन का दायरा भी बढ़ेगा।

डिजिटल व्यवस्था से मिलेगा योजना का लाभ

सरकार ने साफ कहा है कि योजना का लाभ पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के आधार पर दिया जाएगा। इसके लिए एकीकृत किसान पोर्टल, एग्रीस्टेक पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे को आधार बनाया जाएगा। इससे पात्र किसानों की पहचान अधिक पारदर्शी तरीके से हो सकेगी और सहायता राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच सकेगी।

फर्जी दावों पर लगेगी रोक 

डिजिटल सत्यापन व्यवस्था से फर्जी दावों पर रोक लगेगी और वास्तविक किसानों को समय पर लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी। प्रशासन का मानना है कि तकनीक आधारित यह मॉडल कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाएगा।

कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था में लंबे समय का बदलाव ला सकता है। यदि बड़ी संख्या में किसान धान के साथ-साथ अन्य खरीफ फसलों को अपनाते हैं तो प्रदेश में दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ेगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत होगी।

साथ ही जल उपयोग, मिट्टी की गुणवत्ता और बाजार विविधता जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। सरकार को उम्मीद है कि कृषक उन्नति योजना का यह नया मॉडल किसानों के लिए लाभकारी साबित होगा और प्रदेश में टिकाऊ कृषि विकास का रास्ता तैयार करेगा।

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