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छत्तीसगढ़ के इस जिले में स्कूलों का बुरा हालः जर्जर स्कूलों में होगा विद्यार्थियों का स्वागत

महासमुंद। जिले में 16 जून से नए शिक्षा सत्र की शुरुआत होने जा रही है। गर्मी की छुट्टियों के बाद करीब 1.99 लाख विद्यार्थी एक बार फिर स्कूलों का रुख करेंगे, लेकिन मानसून की दस्तक के बीच कई शासकीय विद्यालयों की जर्जर स्थिति विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है। राज्य शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जर्जर भवनों में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं, बावजूद इसके जिले में अनेक विद्यालय ऐसे हैं जहां छतों से पानी टपकने, दीवारों में दरारें आने, प्लास्टर झड़ने और शौचालयों की बदहाल स्थिति जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।

महासमुंद जिले में प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक कुल 1956 शासकीय विद्यालय संचालित हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में 70 से 100 स्कूल भवन ऐसे हैं जिन्हें तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है, जबकि 15 से 20 भवन अत्यधिक जर्जर श्रेणी में शामिल हैं। आगामी बारिश के मौसम में 80 से अधिक विद्यालयों में छत से पानी टपकने की आशंका जताई जा रही है। वहीं 100 से अधिक स्कूलों में शौचालयों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है।

राज्य के स्कूल शिक्षा सचिव ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि जर्जर भवनों में कक्षाएं संचालित होने से किसी प्रकार की दुर्घटना होने पर संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे। इसके बाद जिले में स्कूल भवनों की समीक्षा और निरीक्षण प्रक्रिया तेज कर दी गई है। ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को भवनों की संरचनात्मक स्थिति, छत, बरामदे, पेयजल, विद्युत व्यवस्था और शौचालयों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

पुनर्निर्माण के लिए स्वीकृत 11 भवन भी अधूरे

वर्ष 2025-26 में जिले के 11 जर्जर स्कूल भवनों और एक शासकीय ग्रंथालय भवन के पुनर्निर्माण के लिए 125.75 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपते हुए तीन माह के भीतर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी कई स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।

शिक्षा विभाग के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन ने बताया कि जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए ग्राम पंचायतों को एजेंसी बनाया गया था। कई बार पत्राचार किए जाने के बावजूद सुधार कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो सका। अब सरपंचों को अंतिम बार पत्र भेजकर आवश्यक कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले अधूरे निर्माण और जर्जर भवनों की स्थिति ने शिक्षा विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और स्थानीय लोगों की मांग है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जोखिम वाले भवनों में कक्षाएं संचालित न की जाएं और आवश्यक मरम्मत कार्य तत्काल पूरे किए जाएं।

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