बिलासपुर। राजधानी रायपुर के आमानाका स्थित जर्जर पुलिस आवासों के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस हाउसिंग सोसायटी ने शपथपत्र प्रस्तुत कर नए आवास निर्माण प्रोजेक्ट की जानकारी दी है। कोर्ट को बताया गया कि पुलिस आवासों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभिक स्तर पर शुरू कर दी गई है और इसकी प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
दरअसल, रायपुर के आमानाका क्षेत्र में स्थित पुलिस क्वार्टरों की जर्जर हालत को लेकर प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि करीब 34 वर्ष पुराने 24 पुलिस आवास बेहद खराब स्थिति में हैं। कई मकानों की सीढ़ियां टूटकर गिर चुकी हैं और पहली मंजिल तक जाने वाले रास्ते खंभों के सहारे टिके हुए हैं। ऐसे हालात में करीब 20 परिवार जोखिम के बीच रहने को मजबूर थे।
मामले की पिछली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की खंडपीठ के समक्ष पुलिस हाउसिंग सोसायटी के प्रबंध संचालक एवं आईपीएस अधिकारी पवन देव उपस्थित हुए थे। उन्होंने अदालत को बताया था कि सभी जर्जर आवास खाली करा लिए गए हैं तथा नए निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए शासन से 10 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य शासन ने योजना को मंजूरी प्रदान कर दी, जिसके बाद पुलिस आवास निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान पुलिस हाउसिंग सोसायटी की ओर से शपथपत्र दाखिल किया गया।
शपथपत्र में बताया गया कि रायपुर के संबंधित क्षेत्रों में पुलिस आवास निर्माण परियोजना का प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया गया है। अदालत को यह भी आश्वस्त किया गया कि परियोजना की प्रगति से नियमित रूप से अवगत कराया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई जुलाई माह में निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही इस प्रक्रिया से लंबे समय से जर्जर आवासों में रहने वाले पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों को सुरक्षित एवं आधुनिक आवास मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।


















