बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में सब्जियों की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का स्वाद और बजट दोनों बिगाड़ दिया है। टमाटर समेत कई हरी सब्जियों के दाम पहले से ही ऊंचे बने हुए हैं, वहीं अब अदरक और लहसुन की कीमतों में आई भारी तेजी ने उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ा दी है। पिछले एक माह के दौरान दोनों की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं।
व्यापारियों के अनुसार जून की शुरुआत में अदरक थोक बाजार में 50 से 60 रुपए प्रति किलो और खुदरा बाजार में 70 से 80 रुपए प्रति किलो बिक रहा था। वर्तमान में इसकी कीमत थोक मंडी में 110 से 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि चिल्हर बाजार में उपभोक्ताओं को अदरक 160 से 180 रुपए प्रति किलो खरीदना पड़ रहा है। बिलासपुर में प्रतिदिन कर्नाटक और महाराष्ट्र से लगभग 10 से 15 टन अदरक की आवक हो रही है, लेकिन मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने के कारण कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है।
लहसुन भी पहुंचा 200 रुपए किलो के करीब
अदरक के साथ-साथ लहसुन की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। एक माह पहले थोक बाजार में 50 से 60 रुपए प्रति किलो बिकने वाला लहसुन अब 90 से 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं खुदरा बाजार में इसकी कीमत 180 से 200 रुपए प्रति किलो हो गई है।
तिफरा सब्जी मंडी में इन दिनों मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से लहसुन की आवक हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले वर्ष किसानों को लहसुन की फसल का उचित मूल्य नहीं मिला था, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। इसके चलते इस बार किसानों ने कम क्षेत्र में लहसुन की खेती की, जिसका असर उत्पादन और बाजार में उपलब्धता पर पड़ा है।
आवक कम, दाम ज्यादा
तिफरा थोक सब्जी मंडी व्यापारी संघ के सचिव रामकुमार साहू के अनुसार मंडियों में अदरक और लहसुन की आवक कम होने से कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। थोक और खुदरा दोनों बाजारों में दाम बढ़े हैं। नई फसल बाजार में आने के बाद ही कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
गृहिणियों की बढ़ी परेशानी
सब्जियों की लगातार बढ़ती कीमतों ने गृहिणियों और मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि पहले से महंगी हरी सब्जियों के बीच अदरक और लहसुन जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़ने से मासिक रसोई बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है। कई परिवार अब खर्च नियंत्रित करने के लिए सब्जियों और मसालों की खरीद में कटौती करने को मजबूर हैं।


















