रायपुर। वाहन चालकों के लिए 15 अगस्त से मोटर यान से जुड़े कई नियमों में बदलाव होने जा रहा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत मोटर यान अधिनियम में किए गए संशोधनों को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। नए प्रावधानों का असर ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन दस्तावेज, यातायात उल्लंघन, बीमा और सड़क दुर्घटना मुआवजे से जुड़े मामलों पर पड़ेगा।
सबसे बड़ी राहत ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता को लेकर दी गई है। अब लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बाद भी वह 30 दिन तक प्रभावी माना जाएगा। यानी लाइसेंस की अवधि खत्म होते ही वाहन चालक के खिलाफ उसे अवैध मानकर कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। वहीं, लाइसेंस नवीनीकरण के लिए उसकी समाप्ति से एक वर्ष पहले तक आवेदन किया जा सकेगा। समय पर आवेदन करने पर नवीनीकृत लाइसेंस की वैधता पिछली लाइसेंस अवधि समाप्त होने की तारीख से प्रभावी होगी।
वाहन पंजीकरण से जुड़े दस्तावेजों के लिए 30 दिन
वाहन का पंजीकरण प्रमाण-पत्र रद्द होने या उससे जुड़े कुछ निर्धारित मामलों में आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए मिलने वाली अवधि भी बढ़ाई गई है। पहले यह अवधि 14 दिन थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 दिन कर दिया गया है।
पहली गलती पर कई मामलों में चेतावनी
नए प्रावधानों में छोटे यातायात उल्लंघनों के मामलों में पहली बार गलती करने वाले वाहन चालकों को राहत दी गई है। ऐसे यातायात उल्लंघन जिनके लिए मोटर यान अधिनियम में अलग से जुर्माना या दंड निर्धारित नहीं है, उनमें पहली बार गलती करने पर चेतावनी दर्ज कर छोड़ने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, दूसरी या उसके बाद की गलती पर 500 से 1,500 रुपये तक का दंड लगाया जा सकता है।
बेवजह हॉर्न बजाने पर पहली बार चेतावनी
बिना जरूरत या लगातार हॉर्न बजाने, हॉर्न निषेध क्षेत्र में हॉर्न का इस्तेमाल करने और साइलेंसर के स्थान पर कट-आउट के जरिए धुआं या तेज आवाज निकालने वाले वाहनों के मामलों में पहली बार चेतावनी दी जाएगी। दोबारा ऐसा करते पाए जाने पर 1,000 से 2,000 रुपये तक का दंड लगाया जा सकता है।
बीमा नहीं होने पर अब ज्यादा जुर्माना
बिना वैध मोटर थर्ड पार्टी बीमा के वाहन चलाने पर भी दंड का प्रावधान बदला गया है। पहली बार उल्लंघन पर वाहन के निर्धारित मूल बीमा प्रीमियम का तीन गुना या 5,000 रुपये, जो भी अधिक हो, उतनी राशि का दंड लगाया जाएगा।
दोबारा उल्लंघन करने पर दंड बढ़कर मूल बीमा प्रीमियम का पांच गुना या 10,000 रुपये, जो भी अधिक हो, हो सकता है।
दुर्घटना पीड़ितों को मिलने वाली अतिरिक्त सहायता से मुआवजा कम नहीं होगा
नए नियमों में सड़क दुर्घटना में मौत या गंभीर चोट के मामलों में पीड़ित को मिलने वाली अनुग्रह सहायता राशि को मोटर दुर्घटना मुआवजे से घटाने का प्रावधान नहीं होगा। यानी पीड़ित को सरकार या किसी अन्य माध्यम से मिलने वाली अतिरिक्त सहायता के कारण वैधानिक मुआवजे की राशि कम नहीं की जाएगी।
मुआवजा दावा करने की समय सीमा में राहत
दुर्घटना मुआवजे के लिए आवेदन की सामान्य छह महीने की अवधि समाप्त होने के बाद भी पर्याप्त कारण होने पर दावा अधिकरण आवेदन स्वीकार कर सकेगा। इसके लिए अधिकतम 12 महीने तक अतिरिक्त अवसर दिया जा सकता है।
नए प्रावधानों के अनुसार दावा अधिकरण को मामले का निपटारा 12 महीने के भीतर करने का प्रयास करना होगा। यदि ऐसा नहीं हो पाता है तो देरी के कारण भी दर्ज करने होंगे।
खतरनाक वाहन चलाने पर 5 हजार तक जुर्माना
ऐसे वाहन को सड़क पर चलाने पर भी कार्रवाई होगी, जिसमें कोई ऐसा दोष या खराबी है जिससे सड़क पर लोगों या दूसरे वाहनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे मामले में 5,000 रुपये तक का दंड लगाया जा सकता है।
किन मामलों में समझौते के जरिए खत्म होगा प्रकरण?
नए प्रावधानों में कुछ निर्धारित अपराधों को ही समझौता योग्य बनाया गया है। यानी निर्धारित शुल्क या जुर्माना वसूलने के बाद ऐसे मामलों का निपटारा किया जा सकेगा। इनमें प्रमुख रूप से—
• बिना मंजूरी किसी दूसरे व्यक्ति को वाहन चलाने देना।
• बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाना।
• लाइसेंस से जुड़े निर्धारित अपराध।
• निर्धारित सीमा से अधिक गति से वाहन चलाना।
• खतरनाक तरीके से वाहन चलाना।
• सड़क पर रेसिंग या गति परीक्षण करना।
• सड़क सुरक्षा या वायु प्रदूषण मानकों का दूसरा या बाद का उल्लंघन।
• बिना पंजीकरण वाहन चलाना।
• पंजीकरण से जुड़े निर्धारित अपराध।
• एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देना।
• वाहन के ब्रेक या अन्य यांत्रिक हिस्सों में अनधिकृत दखल देना।
वाहन चालकों के लिए क्या बदलेगा?
नए नियमों का उद्देश्य छोटे उल्लंघनों में अनावश्यक दंडात्मक कार्रवाई कम करना और गंभीर व बार-बार होने वाले उल्लंघनों पर सख्ती बढ़ाना है। वाहन चालकों को लाइसेंस की वैधता, बीमा और वाहन के पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज समय पर अपडेट रखने होंगे। वहीं, बार-बार यातायात नियम तोड़ने पर पहले की तुलना में अधिक आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।


















