ब्रेकिंग खबरें

छत्तीसगढ़ट्रेंडिंगराष्ट्रीय

बालिग युवती ने हाईकोर्ट में कहा- अपनी मर्जी से युवक के साथ रह रही हूं

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यदि कोई बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी के साथ रह रहा है और उसने किसी तरह की गैरकानूनी हिरासत या दबाव से इनकार किया है, तो ऐसे मामले में हेबियस कॉर्पस याचिका का औचित्य नहीं बनता।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष पुलिस ने कथित रूप से लापता युवती को पेश किया। कोर्ट ने युवती से पूछा कि क्या वह अपनी इच्छा से युवक के साथ रह रही है या उसे गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाकर रखा गया है। इस पर युवती ने बताया कि वह करीब 25 वर्ष की बालिग है और अपनी मर्जी से युवक के साथ रह रही है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि उसके साथ कोई अनहोनी नहीं हुई है और न ही किसी ने उसे जबरन रोककर रखा है।

युवती के बयान के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों, पुलिस के समक्ष दिए गए बयान और कोर्ट में दिए गए उसके स्पष्ट बयान से यह सिद्ध होता है कि वह बालिग है और अपनी स्वतंत्र इच्छा से रह रही है। ऐसे में किसी भी प्रकार की गैरकानूनी हिरासत का मामला नहीं बनता, इसलिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।

दरअसल, सरकंडा थाना क्षेत्र निवासी एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि जबलपुर निवासी एक युवक उसकी बेटी को गैरकानूनी तरीके से अपने साथ रखे हुए है। महिला ने युवती को कोर्ट में प्रस्तुत कराने की मांग की थी। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पुलिस को युवती को पेश करने का निर्देश दिया था। आदेश के पालन में पुलिस ने युवती और युवक को अदालत में प्रस्तुत किया, जहां युवती ने स्वयं अपनी इच्छा से युवक के साथ रहने की बात कही। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

What's your reaction?

Related Posts